Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का एक खास दिन होता है। हर महीने की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है, लेकिन जब यह सावन के महीने में आता है, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से दुख, रोग और परेशानियाँ दूर होती हैं और सुख-शांति मिलती है।
कब है सावन का पहला प्रदोष व्रत?
सावन का पहला प्रदोष व्रत 22 जुलाई 2025 (मंगलवार) को है। यह दिन शुक्र प्रदोष कहलाता है और इसे लक्ष्मी और शिव दोनों की कृपा पाने का शुभ अवसर माना जाता है।
व्रत की पूजा कैसे करें?
1.सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
2.दिनभर व्रत रखें फलाहार किया जा सकता है।
3.शाम के समय ‘प्रदोष काल’ में शिवलिंग पर जल, दूध और शहद से अभिषेक करें।
4.बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा अर्पित करें।
5.”ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
6.शिव आरती करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें।
क्या नहीं करना चाहिए?
⦁ व्रत वाले दिन मांसाहार, प्याज-लहसुन न खाएं।
⦁ झूठ बोलने, गुस्सा करने और लड़ाई से बचें।
⦁ मन में बुरे विचार न लाएं।
⦁ तुलसी और केतकी के फूल शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
क्यों खास है सावन का प्रदोष व्रत?
सावन महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इस महीने किया गया प्रदोष व्रत बहुत शुभ माना जाता है। इससे मन शांत होता है, पुराने रोग ठीक होते हैं, और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जिन लोगों की शादी में रुकावट है या घर में क्लेश है, उन्हें यह व्रत जरूर रखना चाहिए। सावन का पहला प्रदोष व्रत 2025 में शिव की विशेष कृपा पाने का सुनहरा मौका है। यदि आप श्रद्धा और नियम से यह व्रत करते हैं, तो जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगेंगी। ये दिन आपके लिए नई ऊर्जा, आस्था और सुख-शांति का कारण बन सकता है। इस शुभ व्रत का पूरा लाभ उठाएं और शिव जी का आशीर्वाद पाएं।

