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Rangbhari Ekadashi 2026: आज है रंगभरी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Rangbhari Ekadashi 2026: 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को देशभर में रंगभरी एकादशी और आमलकी एकादशी श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस बार आर्द्रा नक्षत्र के साथ आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे दिन का महत्व और बढ़ गया है। मान्यता है कि इसी दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती को विवाहोपरांत काशी लेकर आए थे। आइए जानते हैं आज के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, कथा और विशेष उपाय।

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:57 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 से 03:15 बजे तक

सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 10:48 बजे से प्रारंभ (पूरी रात तक)

एकादशी व्रत पारण: 28 फरवरी सुबह 06:47 से 09:06 बजे तक

इन शुभ योगों में पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

आमलकी एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ में आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि आंवले की जड़ में भगवान विष्णु का वास, तने में रुद्र स्वरूप शिव का निवास, शाखाओं में ऋषि-मुनियों और टहनियों में देवताओं का स्थान माना गया है।

इसी कारण इस तिथि पर आंवले के वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

रंगभरी एकादशी की पूजा विधि

यह दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। संभव हो तो स्नान जल में आंवले का रस या चूर्ण मिलाएं।

स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।

घर के मंदिर में भगवान विष्णु या शालिग्राम का पंचामृत से अभिषेक करें।

पीले पुष्प, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें तथा आंवला चढ़ाएं।

आंवले के वृक्ष के पास दीपक जलाकर सात परिक्रमा करें और कच्चा सूत लपेटें।

शिवलिंग का जलाभिषेक कर बेलपत्र, भांग, धतूरा और गुलाल अर्पित करें।

‘विष्णु सहस्त्रनाम’ या ‘शिव चालीसा’ का पाठ करें।

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप लाभकारी माना गया है।

सायंकाल तुलसी और आंवले के वृक्ष के समीप घी का दीप प्रज्वलित करें।

रंगभरी एकादशी की पौराणिक कथा

कथाओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के बाद जब उनका गौना हुआ तो शिवजी उन्हें अपनी नगरी काशी लाए। उस अवसर पर देवताओं और शिवगणों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर स्वागत किया। तभी से फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का पूजन करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

आज के विशेष उपाय

आर्थिक समृद्धि के लिए: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को आंवला अर्पित करें। आंवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।

वैवाहिक सुख के लिए: शिव मंदिर में जाकर भोलेनाथ को बेलपत्र और गुलाल चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।

स्वास्थ्य लाभ के लिए: स्नान के जल में आंवला मिलाकर स्नान करें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य में सुधार आता है।

रंगभरी और आमलकी एकादशी का यह पावन दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने वालों के लिए विशेष फलदायी माना गया है।

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