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Fourth Day Of Navratri: मां कुष्मांडा की कृपा से बदलेगी किस्मत? जानिए पूजा विधि और चमत्कारी भोग

Fourth Day Of Navratri: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इस वर्ष 22 मार्च को श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से मां की आराधना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा को सृष्टि की आदिशक्ति माना जाता है, जिन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।

मां कुष्मांडा का दिव्य स्वरूप

मां कुष्मांडा का रूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी माना जाता है। देवी अष्टभुजा स्वरूप में विराजमान होती हैं और सिंह की सवारी करती हैं। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा होते हैं, जबकि आठवें हाथ में सिद्धियां प्रदान करने वाली जपमाला होती है।
कहा जाता है कि मां सूर्य मंडल के मध्य में निवास करती हैं और उसी ऊर्जा से पूरे ब्रह्मांड को संचालित करती हैं।

पूजा का महत्व

मां कुष्मांडा की आराधना करने से जीवन के कष्ट, रोग और मानसिक तनाव दूर होते हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति को दीर्घायु, यश और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कुष्मांडा ने प्रकाश और जीवन की उत्पत्ति की।

आवश्यक पूजन सामग्री

पूजा के लिए ये सामग्री रखना शुभ माना जाता है:
कलावा, कुमकुम, अक्षत, घी, धूप, चंदन, तिल, पीले वस्त्र, पीली मिठाई, चूड़ियां और अन्य पूजन सामग्री।

पूजा विधि (Step-by-Step)

• सुबह स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें
• सबसे पहले कलश पूजन करें
• इसके बाद मां कुष्मांडा का ध्यान कर पूजा शुरू करें
• हाथ में फूल लेकर देवी का स्मरण करें
• मंत्र “ॐ कुष्माण्डायै नमः” का जाप करें
• पंचामृत से देवी का अभिषेक करें
• घी का दीपक जलाएं
• कुमकुम, चंदन और फूल अर्पित करें
• फल और मिठाई का भोग लगाएं
• अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें

मां को क्या भोग लगाएं?

मां कुष्मांडा को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें केसरिया हलवा, पेठा, मालपुआ और बताशे का भोग लगाया जाता है।
इसके अलावा दही और विभिन्न प्रकार के हलवे भी अर्पित किए जाते हैं, जिन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।

आस्था और विश्वास

मां कुष्मांडा की पूजा से न केवल नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।
नवरात्रि का यह चौथा दिन साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां भक्ति के साथ किया गया हर प्रयास फलदायी माना जाता है।

नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है।

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