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Navratri 2025: आज मां कात्यायनी की पूजा, जानें विधि, मंत्र और शुभ समय

Navratri 2025:  शारदीय नवरात्र 2025 का पावन पर्व 22 सितंबर से शुरू होकर 10 दिनों तक मनाया जा रहा है। इस दौरान भक्त आदिशक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। रविवार, 28 सितंबर को नवरात्र का छठा दिन है, जिसे मां कात्यायनी की आराधना के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की पूजा से साधक को शारीरिक पीड़ा, भय, चिंता, दुख और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं।

मां कात्यायनी की पूजा विधि

सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें, नारंगी रंग के वस्त्र विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

पूजा में मां को लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री, पीले फूल, शहद और पीली मिठाई अर्पित करें।

माता की आरती कर प्रसाद का वितरण करें।

मां कात्यायनी के मंत्र

श्रद्धालु इस दिन विशेष मंत्रों का जप कर मां की कृपा प्राप्त कर सकते हैं—

वंदना मंत्र

कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।

नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः॥

बीज मंत्र

क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः

प्रार्थना मंत्र

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

विशेष उपाय

यदि किसी जातक के विवाह में देरी हो रही है, तो छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा कर उन्हें छह गांठ हल्दी, पान का पत्ता और नारियल अर्पित करें। ऐसा करने से विवाह के योग बनने लगते हैं।

शुभ-अशुभ समय

अभिजीत मुहूर्त: 11:48 से 12:35 बजे तक

अमृत काल: शाम 06:05 से 07:53 बजे तक

राहुकाल: 04:41 से 06:10 बजे तक

ज्येष्ठा नक्षत्र की विशेषताएं

ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक बुद्धिमान, व्यावहारिक, दार्शनिक, महत्वाकांक्षी और आक्रामक प्रवृत्ति के होते हैं। इनका स्वामी बुध देव, राशि स्वामी मंगल देव और नक्षत्र देवता इंद्र हैं। प्रतीक के रूप में बालियां, छत्र या ताबीज माने जाते हैं।

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