Krishna Janmashtami 2025 :भारत में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि भाई कंस के अत्याचार को कारागार में रह सह रही बहन देवकी ने भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अपनी आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण को जन्म दिया था। भगवान विष्णु ने पृथ्वी को कंस के अत्याचार और आतंक से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। इसी कथा के अनुसार हर साल भाद्रपद की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
धार्मिक महत्व क्या है?
श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाते हैं, जिन्होंने धरती पर अधर्म का नाश और धर्म की स्थापना के लिए जन्म लिया। महाभारत के युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो “भगवद्गीता” का उपदेश दिया, वह जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन देता है। उनका जन्म कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने और अन्याय के अंत के प्रतीक के रूप में हुआ। “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…”—श्रीकृष्ण का यह संदेश याद दिलाता है कि धर्म की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए। जन्माष्टमी हमें यह प्रेरणा देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और न्याय का साथ देना चाहिए।
जन्माष्टमी पर कृष्ण लीला, मटकी फोड़, और झांकियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन की झलकियां प्रस्तुत की जाती हैं। इस दिन मंदिरों और घरों में भजन-कीर्तन, सजावट, और सामूहिक पूजा से सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश मिलता है।
तिथि और समय
2025 में कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:49 बजे से प्रारंभ होकर 16 अगस्त की रात 9:34 बजे तक रहेगी। शास्त्रानुसार, “उदै तिथि” अर्थात अष्टमी का दूसरा दिन 16 अगस्त को अधिक मान्य माना गया है, और अधिकांश परंपराओं के अनुसार वही तिथि मानी जा रही है । पूजा-अर्चना के लिए श्रेष्ठ काल 16 अगस्त की रात 12:04 बजे से 12:47 बजे तक निर्धारित है ।
क्या है पूजा-विधि?
- दिन में स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ और सजाकर रखें ।
- लड्डू-गोपाल (बालेश्वर कृष्ण) की प्रतिमा या चित्र को पहले दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
- इसके बाद साफ कपड़े पहनाएं, मुकुट, माला, बाजूबंद, पायल, बांसुरी, मोरपंख, झूला आदि से श्रीकृष्ण का श्रृंगार करें ।
- भोग में माखन-मिश्री, श्रीखंड, मोहन भोग आदि शामिल करें, क्योंकि भगवान इन्हें प्रिय हैं ।
- पूजा के समय “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” जैसे भजन का गाय ये भजन शुभ माना जाता है ।
- दीप जलाकर आरती करें और पूजा के दौरान ताजे फूल चढ़ाएं।
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व्रत और पारण
इस दिन व्रत रखकर रात्रि में श्रीकृष्ण के जन्म पर जागरण, भजन-कीर्तन व पूजा की जाती है। पारण साधारणतया सुबह के बाद होता है, विशेषकर वैष्णव परंपरा में तब तक प्रतीक्षा की जाती है जब तक रोहिणी नक्षत्र न प्राप्त हो जाए।

