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Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि के कितने फेरे लगाने चाहिए, जानिए सही संख्या और महत्व

Holika Dahan 2026: होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन लोग विधि-विधान से पूजा करते हैं और अग्नि की परिक्रमा करते हैं। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि होलिका की अग्नि के कितने फेरे लगाना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं शास्त्रीय मान्यताओं और परंपराओं में क्या कहा गया है।

होलिका दहन में फेरे लगाने का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन की अग्नि नकारात्मक ऊर्जा, बाधाओं और कष्टों को दूर करने का प्रतीक है। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करने से जीवन की समस्याओं का नाश होता है और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। परिक्रमा करते समय श्रद्धा और मन की पवित्रता को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।

कितने फेरे लगाना शुभ माना जाता है

शास्त्रों में निश्चित संख्या का कठोर नियम नहीं बताया गया है, लेकिन परंपरागत रूप से 3, 5 या 7 फेरे शुभ माने जाते हैं।

3 फेरे: तीन फेरे जीवन के तीन मूल तत्व सत्व, रज और तम के संतुलन का प्रतीक माने जाते हैं। कई स्थानों पर सामान्य पूजा के लिए तीन परिक्रमा की जाती हैं।

5 फेरे: पांच फेरे पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसे अधिक शुभ और पूर्ण माना जाता है।

7 फेरे: सात संख्या को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है। जैसे विवाह में सात फेरे लिए जाते हैं, वैसे ही कुछ लोग होलिका दहन में भी सात परिक्रमा करते हैं ताकि परिवार में सुख-शांति बनी रहे।

परिक्रमा करते समय किन बातों का रखें ध्यान

पूजा के बाद ही परिक्रमा करें, अग्नि से सुरक्षित दूरी बनाए रखें, गेहूं की बालियां या नारियल अग्नि में अर्पित करना शुभ माना जाता है, परिक्रमा करते समय परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

धार्मिक दृष्टि से क्या है संदेश

होलिका दहन की कथा भक्त प्रह्लाद की आस्था और विश्वास से जुड़ी है। यह पर्व सिखाता है कि सच्चाई और भक्ति की जीत निश्चित होती है। अग्नि के फेरे उसी विश्वास का प्रतीक हैं कि जीवन की नकारात्मकता जलकर समाप्त हो जाए और नई शुरुआत हो।

होलिका दहन 2026 में अग्नि के 3, 5 या 7 फेरे लगाना शुभ माना जाता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और आस्था। शास्त्र संख्या से अधिक भावना को महत्व देते हैं। इसलिए विधि-विधान के साथ की गई परिक्रमा ही पूर्ण फलदायी मानी जाती है। अगर आप इस वर्ष होलिका दहन में शामिल हो रहे हैं, तो परंपरा और सुरक्षा दोनों का ध्यान रखें और सकारात्मक ऊर्जा के साथ त्योहार मनाएं।

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