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Holika Dahan 2026: होलिका दहन पर इन 8 पेड़ों की न जलाएं लकड़ी, पूजा में एक गलती पड़ सकती है भारी

Holika Dahan 2026: होलिका दहन का त्योहार हर साल सच्चाई और अच्छाई की जीत की याद दिलाता है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात लोग मिलकर होलिका का दहन करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से नकारात्मकता, तनाव और बुरी ऊर्जा दूर हो जाए। साल 2026 में होली 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार को रात में अर्धरात्रि में किया जाएगा।

होलिका दहन का महत्व

मान्यता है कि होलिका दहन की आग न केवल पवन और लकड़ी को जलाती है, बल्कि यह हमारे मन से गुस्सा, जलन, अहंकार और नकारात्मक विचारों को भी दूर करने में मदद करती है। इसलिए इस दिन सही सामग्री का चयन करना बेहद जरूरी माना जाता है।

किन पेड़ों की लकड़ी न जलाएं

कुछ पेड़ों को धार्मिक और पवित्र माना जाता है, इसलिए इन्हें जलाना अशुभ समझा जाता है:

पीपल: पवित्रता का प्रतीक, इसे जलाना वर्जित।

शमी: पूजा में उपयोगी, दहन के लिए न करें।

आम: शुभ कार्यों में इसके पत्ते लगते हैं।

आंवला: धार्मिक और औषधीय महत्व।

नीम: स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद और पवित्र।

केला: पूजा-पाठ में इस्तेमाल।

अशोक: खुशहाली का प्रतीक।

बेल: भगवान शिव को प्रिय, जलाने से बचें।

होलिका दहन में इन चीजों का इस्तेमाल करें

सुरक्षित और शुभ सामग्री का उपयोग कर आप पूजा को प्रभावशाली बना सकते हैं:

सूखी लकड़ियां और टहनियां: प्राकृतिक और आसानी से उपलब्ध।

एरंड और गूलर की सूखी टहनियां: धार्मिक दृष्टि से शुभ।

गाय के गोबर के कंडे: वातावरण को शुद्ध करते हैं।

सूखी घास और खर-पतवार: सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल।

नई फसल की बालियां: समृद्धि और अच्छी फसल के लिए।

नारियल, रोली और चावल: पूजा में शुभ माने जाते हैं।

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