Holi Colours: हिंदू धर्म में होली का पर्व बेहद खास माना जाता है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन यानी रंगों के साथ होली का त्योहार मनाया जाता है। इस साल होली 2026 03 मार्च को होलिका दहन होगा और 04 मार्च को रंगों की होली। ब्रज क्षेत्र में होली के अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं जैसे लड्डूमार होली, लट्ठमार होली, फूलों वाली होली और छड़ीमार होली।
मुख्य आकर्षण हमेशा रंग ही होते हैं। लोग लाल, पीला, हरा, नीला, सफेद और चमकीले रंग लगाकर इस पर्व का आनंद लेते हैं। लेकिन होली के रंग सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, इनके धार्मिक, ज्योतिषीय और स्वास्थ्य संबंधी महत्व भी बताए गए हैं।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यता
ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार, होलाष्टक से लेकर होलिका दहन तक का समय कुछ विशेष ग्रहों की उग्र स्थिति के कारण शुभ नहीं माना जाता। पंडितों का मानना है कि होली के रंगों का उपयोग ग्रहों की प्रतिकूलता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक होता है। रंग व्यक्ति में उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और आरोग्य बढ़ाने का काम करते हैं।
होली के रंगों का महत्व
हरा रंगः ज्योतिष अनुसार हरा रंग बुध ग्रह से जुड़ा है। यह रंग विकास, समृद्धि, संतुलन और मानसिक शांति का प्रतीक है।
पीला रंग: पीला रंग गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है। यह ज्ञान, पवित्रता, ऊर्जा और खुशी का प्रतीक है और गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है।
लाल रंग: लाल रंग मंगल ग्रह से संबंधित है। यह ऊर्जा, शक्ति, साहस और उत्साह का प्रतिनिधित्व करता है।
गुलाबी रंगः गुलाबी रंग शुक्र से जुड़ा माना जाता है। यह प्रेम, स्नेह, कोमलता और शांति का प्रतीक है।
नारंगी रंगः नारंगी रंग सूर्य ग्रह से संबंधित है। यह जीवन में ऊर्जा, उत्साह और खुशी लाने वाला रंग माना जाता है।
इस प्रकार होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि हर रंग का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी है। इन रंगों से सकारात्मकता और उत्साह फैलता है, साथ ही स्वास्थ्य और मानसिक शांति भी बनी रहती है।
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