Holi 2026: होली रंगों और उत्साह का पर्व है, लेकिन यदि इसी दिन चंद्र ग्रहण पड़ जाए, तो लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय संवेदनशील माना जाता है और इस दौरान सूतक काल प्रभावी होता है। कई संत और आध्यात्मिक गुरु इस समय विशेष सावधानी और साधना की सलाह देते हैं।
सूतक काल क्या होता है
सूतक काल ग्रहण शुरू होने से कुछ घंटे पहले लग जाता है। इस दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है। मान्यता है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए ध्यान, मंत्र जाप और भजन करना शुभ माना जाता है।
प्रेमानंद महाराज की सलाह
प्रेमानंद महाराज के अनुसार ग्रहण का समय भय का नहीं, बल्कि भक्ति का अवसर है। उनका कहना है कि इस दौरान मन को शांत रखकर ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। वे विशेष रूप से इन बातों पर जोर देते हैं । भगवान का नाम जप करें, घर में तुलसी के पास दीपक जलाएं, नकारात्मक विचारों से दूर रहें, ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर दान करें।
सूतक काल में करने योग्य उपाय
मंत्र जाप: “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक शांति मिलती है।
ध्यान और भजन: ग्रहण के दौरान ध्यान लगाने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
भोजन से परहेज: सूतक काल में भोजन न करना बेहतर माना जाता है। यदि जरूरी हो तो पहले से बने भोजन में तुलसी पत्ता डाल दें।
ग्रहण के बाद स्नान: ग्रहण समाप्त होने पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
क्या न करें
ग्रहण के समय सोने से बचें, विवाद या नकारात्मक बातचीत न करें, नए कार्य की शुरुआत न करें। होली जैसे पावन पर्व पर यदि चंद्र ग्रहण का संयोग बने, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। श्रद्धा, संयम और सकारात्मक सोच के साथ सूतक काल में साधना करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो सकता है। संतों की सीख यही है कि ग्रहण को डर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर समझें।
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