Holashtak 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार होलाष्टक 2026 24 फरवरी से शुरू हो रहा है। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह या नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करना वर्जित माना जाता है। होलाष्टक केवल एक ऐसा समय नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म में कई और मौके आते हैं जब शुभ कार्यों पर पाबंदी लग जाती है। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से।
खरमास
जब सूर्य ग्रह धनु या मीन राशि में गोचर करता है, तब खरमास शुरू होता है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों का परिणाम लाभकारी नहीं होता। इसलिए विवाह या नए व्यवसाय जैसे मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं।
चातुर्मास
चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल की देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल की देवउठनी एकादशी तक चलता है। चार महीने की इस अवधि में भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में सौंप दिया जाता है। इस समय किसी भी शुभ-मांगलिक कार्य को करने की अनुमति नहीं होती।
पितृपक्ष
पितृपक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन माह की अमावस्या तक रहता है। यह 16 दिनों का समय पितृ पूजा और श्राद्ध के लिए समर्पित होता है। इस दौरान केवल पितरों के तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। शादी, नए घर में प्रवेश, गहनों या कपड़े की खरीदारी जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं।
ग्रहण
सूर्य और चंद्र ग्रहण का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। ग्रहण सूतक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लागू हो जाता है। इसके अलावा जब पंचक चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब भी पंचक लगता है।
पंचक
पंचक पांच प्रकार के होते हैं रोग पंचक, नृप पंचक, चोर पंचक, मृत्यु पंचक और अग्नि पंचक। इस समय भी किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए। लकड़ी का फर्नीचर बनवाना, छत बनवाना या लड़की इकट्ठा करना इन दिनों में वर्जित माने जाते हैं।
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