Sharad Purnima : शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर खाटूश्यामजी धाम आज भक्तिभाव और उल्लास से सराबोर है। आज की रात खाटू के मंदिर में बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार और खीर का भोग अर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर बाबा श्याम के दर्शन के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु खाटू पहुंच रहे हैं।
सफेद थीम में होगा बाबा श्याम का श्रृंगार
शरद पूर्णिमा की चांदनी रात को और भी पावन बनाने के लिए बाबा श्याम को श्वेत थीम में सजाया जाएगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार, बाबा का श्रृंगार पूरी तरह से सफेद फूलों, चांदी के आभूषणों और शुभ्र वस्त्रों से किया जाएगा। इसके साथ ही बाबा को चांदी और रत्नों से जड़ा हुआ मुकुट भी पहनाया जाएगा। चांदनी रात में यह श्वेत श्रृंगार बाबा के रूप को और भी तेजस्वी बना देगा।
रात 12 बजे लगेगा खीर का भोग
धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत बरसता है। इसी वजह से इस रात को बाबा श्याम को खीर का विशेष भोग लगाया जाता है। रात ठीक 12 बजे यह भोग लगाया जाएगा और चंद्रमा की रोशनी में रखी गई खीर को भक्तजन प्रसाद स्वरूप ग्रहण करेंगे।
श्वेत श्रृंगार के दर्शन के लिए उमड़ेंगे हजारों भक्त
मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और व्यवस्था की है। शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) के अवसर पर साल में सिर्फ एक बार बाबा श्याम का श्वेत श्रृंगार किया जाता है, जब पूरा गर्भगृह सफेद रंग की आभा से जगमगा उठता है। भक्त पूरी रात भक्ति संगीत, भजन और कीर्तन में लीन रहेंगे।
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जानिए कौन हैं हारे के सहारे बाबा श्याम
बाबा खाटूश्याम को महाभारत के भीम पुत्र घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक का रूप माना जाता है। कथा के अनुसार, जब बर्बरीक अपने तीन दिव्य बाणों के साथ महाभारत युद्ध में शामिल होने जा रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण वेश में उनसे उनका शीश दान मांगा। बर्बरीक ने निःसंकोच अपना शीश भगवान को अर्पित कर दिया। भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि कलियुग में वे “श्याम” नाम से पूजे जाएंगे और “हारे का सहारा” कहलाएंगे।

