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सावन के आखिरी सोमवार को उमड़ी भक्तों की भीड़, ‘छोटी काशी’ के नाम से जाना जाता है ये जिला

Gola Gokarnath mandir:  आज सावन के चौथे सोमवार की सुबह से ही पूरा वातावरण बाबा भोलेनाथ की भक्ति में डूबा है। जगह-जगह मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ के मंदिर में भी में भक्तों की काफी भीड़ दिखाई दी है। गोला गोकर्णनाथ को छोटी काशी भी कहा जाता है।

प्रशासनिक व्यवस्था से लोग खुश

हालांकि पिछले बार की अपेक्षा इस बार प्रशासन काफी चुस्त दुरुस्त नजर आई। जिसके चलते प्रशासनिक व्यवस्था से लोग खुश नजर आ रहे हैं। अपनी मनोकामना मन्नत लेकर के आने वाले कांवरिया और आम भक्त सभी जैसे भक्ति के रंग में शराबोर नजर आ रहे हैं। ऐसे में जबकि 2 दिन से लगातार बारिश हो रही है।

यथार्थ रूप में विराजमान भोलेनाथ

लोगों का मानना है कि यहां भगवान शिव यथार्थ रूप में विराजमान हैं। माना जाता है जब रावण घोर तपस्या कर बरदान स्वरूप भगवान शिव को अपने साथ लंका ले जाने की जिद पर अड़ा था। तब भगवान शिव ने उसके सामने यह शर्त रखी थी कि उसे जहां पर वह रख देगा। वहीं वह स्थापित हो जाएंगे। इस शर्त पर जब रावण लंका की तरफ भगवान शिव को ले जाने के लिए चला, तो बताया जाता है कि शिव की माया के चलते रावण को लघुशंका प्रतीत हुई और वह शिवलिंग को एक चरवाहे के हाथ में सौंपकर लघु शंका के लिए चला गया।

गोला गोकर्णनाथ को कहा जाता है छोटी काशी

इस बीच भगवान शिव ने अपना वजन बढ़ाना शुरू किया। वह भार सहन नहीं कर पाया और शिवलिंग को जमीन पर रख दिया। इसके बाद रावण ने लाख प्रयास किया लेकिन भगवान शिव वहां से नहीं उठे गुस्से में आखिरकार रावण ने अंगूठे से शिवलिंग वहीं दबा दिया। जिससे शिव कई फिट नीचे चले गए। गोला गोकर्णनाथ को छोटी काशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने और गंगा जल चढ़ाने पर भोले बाबा की कृपा बरसती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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