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Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च? जानें गणगौर व्रत की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Gangaur Vrat 2026: हिंदू धर्म में गणगौर का पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और अविवाहित लड़कियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है। हर साल होली के बाद चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं माता गौरी और भगवान शिव की पूजा कर सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।

गणगौर व्रत 2026 की सही तारीख

साल 2026 में चैत्र शुक्ल तृतीया तिथि के आधार पर गणगौर का व्रत 21 मार्च 2026 को रखा जाएगा। हालांकि तिथि की शुरुआत 20 मार्च को होने के कारण कुछ जगहों पर भ्रम की स्थिति बन जाती है, लेकिन उदया तिथि के अनुसार व्रत और पूजा 21 मार्च को करना अधिक शुभ माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

गणगौर पूजा के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना जाता है। पूजा का शुभ समय प्रातः काल से लेकर दोपहर तक पूजा करना शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर पूजा की जाती है, इस दौरान महिलाएं माता गौरी और भगवान शिव का ध्यान करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं।

गणगौर व्रत का धार्मिक महत्व

गणगौर का पर्व खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए यह व्रत अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है। वहीं अविवाहित कन्याएं भी इस दिन व्रत रखकर अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

गणगौर पूजा की विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें, पूजा स्थान को साफ करके माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें फूल, रोली, अक्षत और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। गणगौर व्रत की कथा सुनें या पढ़ें,अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें,कई स्थानों पर इस दिन महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं और गणगौर की शोभायात्रा भी निकाली जाती है।

गणगौर का पर्व आस्था और परंपरा से जुड़ा खास त्योहार है। साल 2026 में यह व्रत 21 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन विधि-विधान से माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली और सौभाग्य की कामना की जाती है।

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