Falgun Purnima 2026: सनातन परंपरा में वर्षभर आने वाली 12 पूर्णिमाओं में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। इसे वसंत पूर्णिमा और दोल पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर मां लक्ष्मी का अवतरण हुआ था, इसलिए इसे लक्ष्मी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा का भी विधान है।
कब से कब तक रहेगी पूर्णिमा तिथि?
द्रिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि आज शाम 5 बजकर 55 मिनट से प्रारंभ हो रही है और इसका समापन कल शाम 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। आज पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है। हालांकि, 3 मार्च को चंद्रग्रहण लगने के कारण पूजा-पाठ और व्रत संबंधी कार्य ग्रहण काल में वर्जित माने जाते हैं। यही वजह है कि स्नान-दान का विशेष महत्व ग्रहण से पहले के शुभ समय में और बढ़ जाता है।
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या है?
कल सुबह सूर्योदय के साथ ही पूर्णिमा रहेगी, लेकिन सुबह 6 बजकर 20 मिनट से चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाएगा। ऐसे में सूतक लगने से पहले का समय अत्यंत पवित्र माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 5 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना और उसके बाद दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान-दान कई गुना पुण्य प्रदान करता है।
क्या है फाल्गुन पूर्णिमा का महत्व?
मान्यता है कि इस दिन व्रत, स्नान और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन महत्वपूर्ण है। कहा जाता है कि फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत करने से कुंडली में मौजूद चंद्र दोष शांत होता है और मानसिक तनाव में कमी आती है।
इस बार ग्रहण की छाया के कारण पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में श्रद्धालु शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए स्नान-दान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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