Chardham Yatra 2025: चारधाम यात्रा 2025 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। आज बुधवार को उत्तरकाशी जिले स्थित गंगोत्री धाम में मां गंगा मंदिर के कपाट शीतकालीन अवकाश के लिए विधि-विधान से बंद कर दिए गए। सुबह से ही धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। ठीक सुबह 11:30 बजे मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही पूरा परिसर “जय मां गंगे” के जयकारों से गूंज उठा।
इस मौके पर मंदिर को भव्य फूलों और दीयों से सजाया गया, जबकि तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने मां गंगा की उत्सव डोली की पूजा-अर्चना की। कपाट बंद होने के बाद अब मुखबा गांव में स्थित शीतकालीन प्रवास स्थल पर मां गंगा की पूजा की जाएगी। यहीं पर अगले छह महीनों तक भक्त मां गंगा के दर्शन कर सकेंगे।
जाने किस दिन हो रहे कपाट बंद
इसी क्रम में अब 23 अक्तूबर (भैयादूज) के दिन मां यमुना मंदिर, यमुनोत्री धाम के कपाट भी दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद मां यमुना की उत्सव मूर्ति को खरसाली गांव में स्थापित किया जाएगा, जहां शीतकालीन पूजा संपन्न होगी। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि इस साल चारधाम यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। अकेले गंगोत्री धाम में 7,57,762 और यमुनोत्री धाम में 6,44,366 तीर्थयात्री पहुंचे। दोनों धामों में इस यात्राकाल के दौरान कुल 14 लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए।
पूजा के साथ बर्फबारी का आनंद
गंगोत्री के स्थानीय व्यापारी आशीष सेमवाल और विनय उनियाल ने कहा कि शीतकाल में भी मुखबा और खरसाली गांव तक सीमित यात्रा चालू रखी जा सकती है। इससे देश-विदेश के पर्यटक मां गंगा और मां यमुना की पूजा के साथ बर्फबारी का आनंद भी उठा सकेंगे। चारधाम यात्रा के इस सीजन में अब तक कुल 49.30 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों में दर्शन कर चुके हैं।
अनुमान है कि यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा 50 लाख का आंकड़ा पार कर जाएगा। चारधाम यात्रा 2025 इस वर्ष न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नई उड़ान देने में सहायक साबित हुई।
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