Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील समय माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए सूतक काल में पूजा-पाठ और शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं। जब ग्रहण समाप्त हो जाता है, तब घर और मंदिर की शुद्धि करना आवश्यक माना जाता है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।
सबसे पहले करें स्नान
ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है। साफ और धुले हुए वस्त्र धारण करें।
घर की सफाई और गंगाजल का छिड़काव
पूरे घर में झाड़ू-पोंछा करें, मुख्य द्वार और पूजा स्थल को विशेष रूप से साफ करें ,यह प्रक्रिया नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का प्रतीक मानी जाती है।
मंदिर की शुद्धि कैसे करें
घर के मंदिर को साफ कपड़े से पोंछें। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को हल्के गीले कपड़े से साफ करें। दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती दिखाएं।
भोजन की शुद्धि
ग्रहण से पहले बनाए गए भोजन को ग्रहण के बाद उपयोग न करने की मान्यता है। ताजा भोजन तैयार करें और पहले भगवान को भोग लगाएं। यदि पहले से रखे भोजन में तुलसी पत्र डाला गया हो, तो उसे शुद्ध माना जाता है।
दान और पूजा
ग्रहण के बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। यह पुण्य फल देने वाला माना जाता है। साथ ही, परिवार के साथ मिलकर संक्षिप्त पूजा और आरती करें।
चंद्र ग्रहण 2026 के बाद घर और मंदिर की शुद्धि करना धार्मिक परंपराओं का अहम हिस्सा है। स्नान, सफाई, गंगाजल छिड़काव और मंत्र जाप से सकारात्मक ऊर्जा लौटने की मान्यता है। श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए ये छोटे-छोटे कदम घर में शांति और पवित्रता बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।
ये भी पढ़ें: सबसे पहले महाकाल के दरबार में होती है होलिका दहन, क्या है इसके पीछे की मान्यता

