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Bhishma Ashtami 2026: आज भीष्म अष्टमी, जानें पूजा विधि और इस पर्व का महत्व

Bhishma Ashtami 2026: हिंदू धर्म में माघ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को भीष्म अष्टमी के रूप में श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। यह पर्व महाभारत के गंगापुत्र भीष्म पितामह की पुण्य तिथि से जुड़ा हुआ है। धर्मग्रंथों के अनुसार भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था। हिंदू मान्यता के अनुसार उत्तरायण काल में प्राण त्यागने वाले व्यक्ति को सीधे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। इस कारण भीष्म अष्टमी को भीष्म पितामह की पुण्य तिथि के रूप में विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन श्रद्धालु विशेष व्रत रखते हैं, तर्पण करते हैं और कथा पाठ करके पितृ कृपा प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं इस पावन तिथि का मुहूर्त, तर्पण और धार्मिक महत्व।

भीष्म अष्टमी का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार माघ मास, शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी 2026, रात्रि 11:10 बजे से प्रारंभ होकर 26 जनवरी 2026, रात्रि 09:17 बजे तक रहेगी। मध्याह्न काल प्रात: 11:09 बजे से दोपहर 01:23 बजे तक रहेगा।

भीष्म अष्टमी पर तर्पण कैसे करें

भीष्म पितामह ने अपने जीवनकाल में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया। उनकी पुण्य स्मृति में तर्पण करने से पितृ ऋण मुक्ति होती है।

तर्पण विधि

अपसव्य और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।

तिल, जौ, कुश और स्वच्छ जल एक थाली में रखें।

मन और तन को शुद्ध करके जल अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच से डालें।

तर्पण के बाद जल किसी वृक्ष की जड़ में डाल दें।

मंत्र

वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च.
गंगापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे..
भीष्म: शान्तनवो वीर: सत्यवादी जितेन्द्रिय:.
आभिरभिद्रवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम्..

श्रद्धालु इस दिन ‘ॐ भीष्माय नमः’ मंत्र का जाप कर सकते हैं या भीष्म कथा का पाठ कर पितृ कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

भीष्म अष्टमी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति भीष्म अष्टमी के दिन पितृ तर्पण करता है, उसके किए-अनकिये पाप और दोष दूर हो जाते हैं। इस दिन पांडवों ने भी अपने गुरु और पितामह के लिए श्राद्ध, तर्पण और जल दान किया था। यह पावन तिथि पितृ कृपा प्राप्त करने और पुण्य फल प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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