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Anant Chaturdashi 2025 : पूजा विधि, गणपति विसर्जन मुहूर्त और पूजन मंत्र

Anant Chaturdashi 2025 : अनंत चतुर्दशी का पर्व इस वर्ष 6 सितंबर 2025 यानि आज को बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह दिन गणेश चतुर्थी के 10 दिवसीय महोत्सव का अंतिम पड़ाव माना जाता है, जब श्रद्धालु गणपति बप्पा को भावभीनी विदाई देकर जल में विसर्जित करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के “अनंत” स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवसर पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और अनंत सूत्र धारण करने से विष्णु भगवान और श्रीगणेश दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अनंत चतुर्दशी पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल पर चौकी स्थापित करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र रखें।
  • प्रतिमा के समीप एक कलश रखें और उस पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
  • अनंत सूत्र (गुलाबी या पीले रंग का धागा जिसमें 14 गांठें होती हैं) पूजा में रखें और बाद में दाहिने हाथ में बांधें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, पीला चंदन, वस्त्र, मिठाई और फल अर्पित करें।
  • ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें।
  • अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें।

गणेश विसर्जन 2025 शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन का विशेष महत्व है। इस वर्ष विसर्जन के लिए कई शुभ काल बताए गए हैं
सुबह 07:36 बजे से 09:10 बजे तक, दोपहर 12:17 बजे से शाम 04:59 बजे तक, शाम 06:37 बजे से रात 08:02 बजे तक, रात्रिकालीन मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)में रात 09:28 बजे से 01:45 बजे तक (7 सितंबर), उषाकाल मुहूर्त (लाभ) में सुबह 04:36 बजे से 06:02 बजे तक (7 सितंबर)

गणपति विसर्जन विधि

विसर्जन से पूर्व भगवान गणेश (Anant Chaturdashi 2025) की अंतिम पूजा की जाती है। भक्त मोदक, लड्डू, फल और फूल अर्पित करते हैं। परिवार संग आरती करके गणपति बप्पा से क्षमा याचना की जाती है। पारंपरिक रूप से “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” कहकर बप्पा को विदाई दी जाती है। इसके बाद श्रद्धा और सम्मानपूर्वक गणेश प्रतिमा का विसर्जन किसी नदी, तालाब या समुद्र में किया जाता है।

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पूजन मंत्र

ॐ अनंताय नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

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