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“हम विजेता नहीं, संस्कृति के दूत हैं: मोहन भागवत बोले – हमारे पूर्वजों ने दुनिया को ज्ञान दिया, धर्मांतरण नहीं किया”

by | Oct 19, 2025 | Others

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैचारिक शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने पूरी दुनिया को संस्कृति और विज्ञान की शिक्षा दी, लेकिन कभी किसी देश पर विजय प्राप्त नहीं की और न ही किसी का धर्मांतरण किया। वे दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम ‘आर्य युग विषय कोष विश्वकोश’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रसार

भागवत ने कहा, “हमारे पूर्वज मेक्सिको से लेकर साइबेरिया तक गए। उन्होंने ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रसार किया, लेकिन किसी पर सत्ता नहीं जमाई। हम हमेशा से एकता और सद्भाव का संदेश लेकर चलते रहे हैं।” उन्होंने बताया कि भारत की संस्कृति “विजय” नहीं, बल्कि “विज्ञान और विचार” पर आधारित रही है। संघ प्रमुख ने कहा कि इतिहास में कई आक्रमणकारियों ने भारत को लूटा, लेकिन सबसे गहरा घाव अंग्रेजों ने दिया। उनके अनुसार, “अंतिम आक्रमणकारियों यानी अंग्रेजों ने हमारे मन को लूटा। उन्होंने हमें यह यकीन दिलाया कि हम कमजोर हैं। हम अपनी ताकत, अपनी परंपरा और अपनी विशिष्टता भूल गए।”

सोच और शिक्षा में विदेशी

भागवत ने कहा कि आज जरूरत है कि हम उस मानसिक गुलामी से मुक्त हों, जो अंग्रेजों की शिक्षा व्यवस्था-मैकाले पद्धति’ ने हमारे भीतर रोप दी। “हम भारतीय हैं, लेकिन सोच और शिक्षा में विदेशी बन गए। जब तक हम उस प्रभाव से मुक्त नहीं होंगे, तब तक अपने ज्ञान और परंपरा का सही मूल्य नहीं समझ पाएंगे,”। संघ प्रमुख ने आगे कहा कि आर्यव्रत के वंशज होने के नाते हमारे पास विज्ञान, शक्ति, विश्वास और आध्यात्मिकता सब कुछ मौजूद है। “भारत के आध्यात्मिक ज्ञान की जड़ें आज भी जीवित हैं। हमें सिर्फ अपने मूल तक लौटने की जरूरत है।

जो बेकार उसे त्यागे

भागवत ने यह भी कहा कि भारत को दुनिया की प्रगति से सीखना चाहिए “दुनिया ने जो अच्छा किया है, उसे स्वीकार करें; जो बेकार है, उसे त्याग दें। यही भारतीय दृष्टिकोण- समरसता में विकास है। उन्होंने अंत में कहा कि जब भारत अपने ज्ञान और परंपरा के प्रति फिर से जागृत होगा, तब दुनिया में सच्चे अर्थों में शांति और सभ्यता की दिशा भारत ही दिखाएगा।

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