Tamil Nadu Stampede : तमिलनाडु के करुर में विजय की रैली में भगदड़ मचने से अबतक 40 लोगों की जान जा चुकी है और 60 से ज्यादा घायल हो गए है। विजय की पार्टी TVK ने CBI जांच की मांग की है वहीं बीजेपी ने डीएमके सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने टीवीके नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। विजय ने मृतकों के परिवार को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।
करूर रैली में हुई भगदड़ के बाद विजय के प्रमुख सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। वहीं, पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। टीवीके का आरोप है कि इस घटना के पीछे एक गहरी साजिश हो सकती है। राज्य द्वारा नियुक्त न्यायिक आयोग ने भी घटना की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने टीवीके नेताओं मथियाझागन, बुस्सी आनंद और सीटी निर्मल कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या का प्रयास, गैर-इरादतन हत्या, जीवन को खतरे में डालने वाले लापरवाहीपूर्ण कार्य, कानूनी आदेशों की अवहेलना और तमिलनाडु सार्वजनिक संपत्ति क्षति अधिनियम के उल्लंघन के मामले दर्ज किए हैं।
विजय की पार्टी टीवीके ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने मांग की है कि भगदड़ की जांच सीबीआई से कराई जाए। टीवीके का कहना है कि अचानक बिजली गुल होने और पथराव की वजह से भगदड़ हुई। इस मामले की सुनवाई आज हाईकोर्ट में होगी। वहीं, बीजेपी नेता अन्नामलाई ने भी पुलिस और प्रशासन की लापरवाही बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
इस हादसे में 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। विजय ने घोषणा की है कि मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
रविवार को विजय का करूर जाने का कार्यक्रम था, लेकिन हाल ही में हुई भगदड़ के बाद सरकार ने सुरक्षा कारणों से उन्हें वहां न जाने की सलाह दी। सरकार ने चेतावनी दी कि उनकी मौजूदगी से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
विजय की पार्टी के आरोपों का खंडन करते हुए तमिलनाडु पुलिस ने कहा कि करूर रैली में लाठीचार्ज या पथराव जैसी कोई घटना नहीं हुई। पुलिस ने बताया कि पार्टी के नेताओं ने रैली के दौरान सरकारी निर्देशों की अवहेलना की।
पुलिस के मुताबिक, करूर की घटना उस समय बढ़ गई जब विजय रैली में आए। उनके आते ही लोग उत्साहित होकर आगे बढ़ने लगे, जिससे युवाओं और मौजूद लोगों को काबू में रखना मुश्किल हो गया।
इस घटना की जांच के लिए तमिलनाडु सरकार ने न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया। आयोग ने तुरंत जांच शुरू कर दी है।

