Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस 2026 कल मनाया जाएगा, और देश भर में लोग तिरंगे की शान में अपनी देशभक्ति का उत्सव मनाने के लिए तैयार हैं। इस विशेष अवसर पर तिरंगा हर किसी के दिल में गर्व का अहसास पैदा करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तिरंगे को फहराने के लिए भारतीय ध्वज संहिता, 2002 और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत कुछ कड़े और स्पष्ट नियम हैं? खासतौर पर रात में तिरंगा फहराने को लेकर कई सवाल उठते हैं। तो क्या रात के समय छत पर तिरंगा फहराना संभव है? आइए, जानते हैं इस परंपरा और नियमों के बारे में।
रात में तिरंगा फहराने का नियम
भारतीय ध्वज संहिता 2002 में 2022 में किए गए संशोधनों के बाद, नागरिकों को रात के समय तिरंगा फहराने की अनुमति दी गई है। पहले नियम था कि तिरंगा केवल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ही फहराया जा सकता था। लेकिन अब रात में तिरंगा फहराने के लिए एक शर्त जुड़ी है – तिरंगे की उचित रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वह पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे और उसकी गरिमा बरकरार रहे। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि झंडा रात के समय भी सम्मानजनक तरीके से दिखाई दे।
तिरंगा फहराने के अन्य नियम
तिरंगे को फहराने के कुछ और जरूरी नियम भी हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है:
सही दिशा में फहराना: तिरंगे को हमेशा केसरिया रंग ऊपर और हरा रंग नीचे रखते हुए फहराना चाहिए। यदि इसे उल्टा फहराया जाए तो यह अपमानजनक माना जाएगा।
झंडा की स्थिति: तिरंगा कभी भी कटा-फटा, गंदा या फीका नहीं होना चाहिए। यह साफ, नया और उसकी रंगत में पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए।
झंडे का सम्मान: तिरंगे को न तो कभी जमीन पर रखा जाता है, न ही झुकाया जाता है। इसे हमेशा सम्मान के साथ फहराया जाता है।
सामान्य झंडे से ऊंचा: तिरंगा हमेशा अन्य किसी भी झंडे से ऊंचा होना चाहिए। यह देश के सम्मान का प्रतीक है।
छत पर तिरंगा: अगर तिरंगा छत पर फहराया जा रहा है, तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि यह एक सम्मानजनक स्थान पर हो और हवा में स्वतंत्र रूप से लहराए। इसे किसी अन्य वस्तु से ढका नहीं जाना चाहिए।
सजावट के रूप में नहीं: तिरंगे का उपयोग सजावट, पर्दे या कपड़े के रूप में नहीं किया जा सकता है। यह राष्ट्रीय ध्वज है, और इसका सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
पानी में तिरंगा: तिरंगे को कभी भी पानी में डुबाना नहीं चाहिए। यह उसके सम्मान और गरिमा के खिलाफ होगा।
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