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ऑपरेशन मार्कशीट: महर्षि यूनिवर्सिटी में नकली डिग्री की फैक्ट्री, चंद रुपयों में बिक रहा देश का भविष्य

नोएडा की महर्षि यूनिवर्सिटी में ‘डिग्री सेल’ का सनसनीखेज खुलासा। बिना परीक्षा, बिना क्लास, बस पैसा दीजिए और बन जाइए वकील या इंजीनियर। न्यूज इंडिया के स्टिंग ऑपरेशन में फंसे फर्जीवाड़े के बड़े चेहरे।

नोएडा | विशेष रिपोर्ट

संवाददाता: न्यूज इंडिया

जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘परीक्षा पे चर्चा’ कर रहे होते हैं और युवाओं को ‘विकसित भारत’ का आधार स्तंभ बताते हैं, तब दिल्ली से सटे नोएडा में शिक्षा का एक ऐसा मंदिर है जो युवाओं के भविष्य की बलि चढ़ा रहा है। महर्षि यूनिवर्सिटी (Maharishi University) में चल रहा नकली डिग्री का काला कारोबार आज देश के सामने है। यहाँ योग्यता की नहीं, बल्कि नोटों की गड्डी की कीमत है।

चांसलर अजय प्रकाश श्रीवास्तव की नाक के नीचे काला खेल

न्यूज इंडिया के स्टिंग ऑपरेशन ‘ऑपरेशन मार्कशीट’ में जो तस्वीरें और सबूत सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े करने वाले हैं। यूनिवर्सिटी के चांसलर अजय प्रकाश श्रीवास्तव की साख पर गहरा सवाल खड़ा होता है कि आखिर कैसे उनकी नाक के नीचे मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग और लॉ जैसी डिग्रियां रेवड़ियों की तरह बांटी जा रही हैं।

स्टिंग ऑपरेशन: 3 लाख में एलएलबी की डिग्री का सौदा

न्यूज इंडिया की टीम ने जब छात्र बनकर यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर कॉरपोरेट अफेयर्स, रतीश गुप्ता से संपर्क किया, तो भ्रष्टाचार की परतें खुद-ब-खुद खुलती चली गईं।

  • बिना परीक्षा डिग्री: रतीश गुप्ता ने साफ तौर पर कहा कि परीक्षा देने की कोई जरूरत नहीं है।
  • सॉल्वर का इंतजाम: यदि छात्र खुद नहीं लिख सकता, तो यूनिवर्सिटी ₹30,000 के अतिरिक्त शुल्क पर ‘लिखने वाला’ (सॉल्वर) भी उपलब्ध कराती है।
  • एडवांस की डिमांड: सौदेबाजी के पहले ही दौर में ₹50,000 एडवांस लिए गए और कुल ₹3 लाख में डिग्री का सौदा तय हुआ।
  • पिछली तारीखों का खेल: बैकडेट में डिग्री और सेमेस्टर मैनेज करने का आश्वासन भी कैमरे पर रिकॉर्ड हुआ है।

“पिक्चर देखिए, एन्जॉय कीजिए… डिग्री घर पहुंच जाएगी”

यूनिवर्सिटी के बिचौलियों का दावा है कि आपको पेन उठाने की भी जरूरत नहीं है। आप मॉल में घूमिए, फिल्में देखिए, आपकी जगह कोई और परीक्षा देगा और आपकी मार्कशीट एक लिफाफे में बंद होकर आपके घर पहुंच जाएगी।

बड़ा सवाल: अगर बिना पढ़े कोई वकील कोर्ट में खड़ा होगा या बिना ज्ञान वाला इंजीनियर पुल बनाएगा, तो क्या वह समाज और देश के लिए किसी खतरे से कम होगा?

स्टिंग में कैद बातचीत के मुख्य अंश

हमारी टीम और रतीश गुप्ता के बीच हुई बातचीत के कुछ चौंकाने वाले हिस्से:

  • रतीश गुप्ता: “अभी जून में करा देंगे एग्जाम आपके दोनों सेमेस्टर के… 21 से 26 वाले बैच में सीटें मिल जाएंगी।”
  • टीम: “क्या कोई और लिख देगा?”
  • रतीश गुप्ता: “दिक्कत होती है, पूरी चेकिंग होती है… ₹30,000 करा देना बस इसमें।”

युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कब तक?

महर्षि यूनिवर्सिटी की यह काली करतूत न केवल योग्य छात्रों के हक पर डाका है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है। फर्जी प्रोफेशनल तैयार करना देश को ‘ब्लैक होल’ में धकेलने जैसा है।

न्यूज इंडिया के सवाल:

  1. क्या प्रशासन इन फर्जी डिग्री के सौदागरों पर नकेल कसेगा?
  2. क्या चांसलर अजय प्रकाश श्रीवास्तव की भूमिका की जांच होगी?
  3. उन हजारों डिग्रियों का क्या होगा जो पहले ही इस ‘फैक्ट्री’ से निकल चुकी हैं?

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