Nag Panchami 2025: भारत में रामायण और महाभारत काल से लेकर अब तक तरह-तरह की रहस्यमयी घटनाएं घटित होती रहती हैं। यही कारण है कि यहां मौजूद मंदिर, शिवालय लोगों में आस्था के साथ-साथ चर्चा का विषय भी बने रहते हैं। औरैया जिले के दिबियापुर के पास स्थित सेहुद गांव के टीले पर बना धौरा नाग मंदिर भी लोकप्रिय है। नाग देवता के इस अनोखे मंदिर को लेकर कहा जाता है कि जिस किसी ने इस मंदिर पर छत डालने की कोशिश की तो उसकी मौत हुई या फिर उसे किसी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
आज तक नहीं डाली जा सकी छत
धौरा नाग मंदिर में आज तक छत नहीं डाली जा सकी। मंदिर में मौजूद देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि साक्षात नाग देवता (Nag Panchami 2025) मंदिर परिसर में बात करते हैं और कभी-कभी लोगों को दर्शन भी देते हैं। मंदिर में छत ना होना लोगों को आश्चर्यचकित करता है। कहते हैं मंदिर में जिसने भी छत डलवाने की कोशिश की वो इसमें असफल रहे। छत डलवाने वाले की या तो मौत हो जाती है या फिर उसका बड़ा नुकसान हो जाता है।
सामान तक नहीं ले जा सकता कोई
लोगों का मानना है कि गांव के ही एक इंजीनियर ने नाग मंदिर में छत डलवाने की कोशिश की थी, जिसके बाद उनके घर में दो लोगों की आकस्मिक मौत हो गई। यही कारण है कि छत तो दूर इस मंदिर से कोई सामान तक अपने साथ नहीं ले जा सकता है।
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जानकारी के मुताबिक, मंदिर की प्राचीनता के साथ-साथ यहां की घटनाएं भी दिल दहलाने वाली हैं। ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर में सदियों पुरानी मूर्तियां पड़ी हैं जो 11वीं सदी में मोहम्मद गजनवी के आक्रमण के समय मंदिरों के तोड़फोड़ के सच को बयां करती हैं।
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