Dehradun Cloud Burst: पश्चिमी हिमालयी राज्यों में मानसून कहर बरपा रहा है। सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात हुई भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। हिमाचल और उत्तराखंड दोनों राज्यों में हालात गंभीर हैं। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं, लेकिन तबाही की भयावह तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं।
हिमाचल में तबाही
हिमाचल प्रदेश में बुधवार को कई हिस्सों में भारी बारिश हुई। कांगड़ा जिले में 10 मकान पूरी तरह ढह गए और लगभग 50 मकानों को नुकसान पहुंचा। 64 गोशालाएं और एक दुकान भी क्षतिग्रस्त हुईं। प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 1,500 से अधिक घर पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 417 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 45 लोग अब भी लापता हैं।
प्रदेश में 517 सड़कें, 441 बिजली ट्रांसफार्मर और 274 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। प्रशासन लगातार मरम्मत और राहत कार्यों में जुटा हुआ है।
उत्तराखंड में फंसे सैलानी, कई नदियां उफान पर
उत्तराखंड में देहरादून-मसूरी मार्ग बारिश और भूस्खलन से जगह-जगह से टूट गया है, जिसके चलते मसूरी में करीब 2,500 सैलानी फंसे हुए हैं। हल्के वाहनों के लिए कोल्हूखेत में एक वैकल्पिक बेली ब्रिज बनाया जा रहा है, जिसे जल्द खोलने की संभावना है। हालांकि विकासनगर के रास्ते कुछ सैलानी बुधवार को लौटने में सफल रहे।
देहरादून घाटी में आई आपदा में पांच और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इनमें तीन शव देहरादून में और दो सहारनपुर (यमुना नदी) में मिले हैं। अब तक 23 लोगों के लापता होने की सूचना है, जिनमें सहारनपुर के छह मजदूर भी शामिल हैं।
बादल फटने पर विवाद, SDRF का सर्च ऑपरेशन जारी
देहरादून में सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात को हुई बारिश ने सबसे अधिक तबाही मचाई। विभिन्न स्थानों पर नदी में बहने और मलबे में दबने से 17 लोगों की मौत हुई। प्रशासन ने आधिकारिक रूप से 13 मौत, तीन घायल और 13 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है।
जिले में 11 नदियां उफान पर हैं, 13 पुल और 62 सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं। सहस्रधारा के पास बादल फटने की घटना से भारी नुकसान हुआ, हालांकि मौसम विभाग ने बादल फटने की घटना से इनकार किया है।
एसडीआरएफ ने बुधवार सुबह से कई गांवों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। फुलेत गांव में मकान ढहने से आठ लोग दब गए। राहत कार्यों के दौरान शव लगातार बरामद हो रहे हैं।

