Pooja Pal Meet Yogi : लखनऊ की राजनीति में शनिवार को बड़ी हलचल देखने को मिली जब समाजवादी पार्टी से हाल ही में निष्कासित विधायक पूजा पाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मिलने पहुंचीं। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक हलकों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक कार्यालय ने एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि पूजा पाल ने लखनऊ में शिष्टाचार भेंट की।
मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज से आज लखनऊ में जनपद कौशांबी के चायल विधान सभा क्षेत्र की माननीय विधायक श्रीमती पूजा पाल जी ने शिष्टाचार भेंट की।@poojaplofficial pic.twitter.com/mQkYWZpK5h
— Yogi Adityanath Office (@myogioffice) August 16, 2025
सपा से निकाले जाने के बाद पहुंचीं सीएम से मिलने
गौरतलब है कि पूजा पाल समाजवादी पार्टी से जुड़ी रही हैं और हाल ही में उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया। इस निष्कासन के बाद उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है कि क्या वह जल्द भारतीय जनता पार्टी का रुख कर सकती हैं। हालांकि सीएम ऑफिस की तरफ से इस मुलाकात को सिर्फ शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन राजनीति में ऐसे कदमों के अलग तरह से देखा जा सकता हैं।
सपा से किया गया निष्कासित
सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने कुछ दिन पहले ही पूजा पाल को लेकर बयान दिया था कि उनका हाल केशव प्रसाद मौर्य जैसा होगा और वह अब कभी पार्टी की विधायक नहीं बन पाएंगी। शिवपाल का यह बयान ऐसे समय में आया था जब सपा ने पूजा पाल पर अनुशासनहीनता का ठप्पा लगाकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था। पूजा पाल का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वह पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी हैं जिनकी 2005 में हत्या कर दी गई थी। पति की हत्या के बाद पूजा ने राजनीति में कदम रखा और बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में वह चायल सीट से सपा प्रत्याशी के रूप में जीतकर विधायक बनीं।
पूजा पाल का सियासी सफर बदला?
अब सवाल यह है कि सपा से बाहर होने के बाद उनका अगला कदम क्या होगा। क्या वह भाजपा में शामिल होकर नया सियासी सफर शुरू करेंगी या फिर स्वतंत्र रूप से राजनीति करेंगी? भाजपा के लिए भी यह मौका अहम माना जा रहा है क्योंकि प्रयागराज और कौशांबी की राजनीति में पूजा पाल का प्रभाव है। ऐसे में अगर वह भाजपा का हिस्सा बनती हैं तो पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिल सकती है। फिलहाल, भाजपा या खुद पूजा पाल की तरफ से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पूजा पाल की राजनीतिक यात्रा किस दिशा में जाती है और सपा इस घटनाक्रम से कैसे निपटती है। जनता की निगाहें भी इस पर टिकी हुई हैं।
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