MEA reaction on Russian Oil: भारत के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘भारत रूस से तेल की ख़रीद बंद कर देगा’ बयान पर गुरुवार को प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “जहां तक भारत की ऊर्जा आपूर्ति का सवाल है, सरकार कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कह चुकी है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। और ये करने के लिए बाज़ार की परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के मुताबिक ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का आधार है। भारत ने सभी क़दम इसी सोच के साथ उठाए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।”
ट्रंप के बयान रूस का भी आया है रिएक्शन
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने बुधवार को कहा कि भारत के रूस के साथ ऊर्जा सहयोग के अपने रुख़ पर फिर से विचार करने का कोई कारण नहीं है। मारिया ने कहा कि व्यापार दोनों देशों के लिए लाभकारी है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता बनाए रखने में योगदान देता है। मारिया ने कहा कि अमेरिका के लिए यह नया नहीं है कि वह किसी स्वतंत्र देश पर व्यापार के मामले में दबाव डालना अपना अधिकार समझता है।
रूसी तेल को लेकर क्या था अमेरिका का दावा?
भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद अब व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट का बयान आया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है, जो उनके अनुसार अमेरिकी श्रमिकों और उद्योगों के लिए फायदेमंद होगा। वर्तमान में वेनेजुएला के तेल व्यापार को वाशिंगटन ही संभाल रहा है।
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