India-US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलने के बाद भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। इससे गार्मेंट्स, लैदर और फुटवियर सेक्टर की भारतीय कंपनियों का सामान अमेरिका में सस्ता हो जाएगा और लोगों के बीच भारी मांग बढ़ने की उम्मीद बढ़ जाएगी। बीजेपी इसे भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मान रही है। बता दें कि पिछले सप्ताह यूके के साथ ट्रेड डील फाइनल होने के बाद महसूस होने लगा था कि अमेरिका अब भारत के साथ ट्रेड एग्रीमेंट कर सकता है। लेकिन इतनी जल्दी हो जाएगा, ऐसी उम्मीद नहीं थी। आइये जानते हैं वे कौन से कारण हैं जो अमेरिका को भारत संग ट्रेड डील के लिए ट्रैक पर ले आएं।
ट्रंप ने 3 सोशल मीडिया पोस्ट से दी जानकारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत संग ट्रेड डील को लेकर एक के बाद एक तीन सोशल मीडिया पोस्ट किए। साथ ही उन्होंने भारतीय सामानों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को घटाने और ट्रेड डील होने ही जानकारी दी।
भारत 500 अरब डॉलर में अमेरिकी प्रॉडक्ट्स खरीदेगा
राष्ट्रपति ट्रंप ने कई मौके पर फर्स्ट अमेरिका की बात की है। इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने भारत के साथ यह ट्रेड डील की है। डील के तहत भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा, जिसमें ऊर्जा, एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी समेत अन्य सामान है। माना जा रहा है कि इस डील से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।
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भारत को वेनेजुएला का तेल खरीदने को मनाने के लिए
भारत फिलहाल अपने उपयोग का ज्यादातर तेल रूस से आयात कर रहा था। जो अमेरिका के अतिरिक्त टैरिफ के बाद भी जारी रहा था। हालांकि भारत ने कई मौकों पर साफ किया है कि उसे जहां भी सस्ता तेल मिलेगा वह उससे अपना तेल खरीदता रहेगा। ऐसे में ट्रंप के सामने विकल्प था कि अगर ट्रेड डील हो जाए तो वह वेनेजुएला के तेल की बिक्री भारत को कर अपनी आमदनी बढ़ा सकता है। इस तरह वह यूक्रेन का युद्ध रुकवाने के लिए रूस की तेल से होने होने वाली कमई को रोक सकता है। यानी इस ट्रेड डील के जरिए एक तीर से 2 निशाने साध रहा है।
भारत की चीन और ईयू के साथ नजदीकी भी बना अहम कारण
अमेरिका का भारत के साथ ट्रेड डील करने का बड़ा कारण यूरोपियन यूनियन और चीन का भारत के साथ नजदीक जाना है। हाल ही में चीन और भारत के बीच हवाई सेवा शुरू हुई है। इससे पहले पीएम मोदी ने चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी। वहीं दूसरी ओर ईयू का प्रतिनिधिमंडल ने भारत के साथ अहम समझौते किए जिनमें एफटीए शामिल है। अमेरिका खुद को ग्रीनलैंड के मुद्दे पर नाटो में अलग-थलग देख रहा है। ऐसे में अमेरिका ने ट्रेड डील के जरिए और टैरिफ घटाकर उसने फिर से भारत का साथ पा लिया है।
भारत का चाबहार पोर्ट के लिए पैसा ना देना अमेरिका का समर्थन
हाल ही में पेश किए गए बजट में ईरान के चाबहार पोर्ट के लिए कोई पैसा नहीं दिया गया। इसे अमेरिका का समर्थन माना जा रहा है। बता दे कि ईरान और अमेरिका में तनाव चल रहा है। अमेरिका ने अपना युद्ध पोत खाड़ी में तैनात किया है और अमेरिका न्यूक्लियर के मुद्दे पर ईरान से समझौता चाहता है। ऐसे में चाबहार के लिए पैसा ना देना अमेरिका भारत को अपने साथ देख रहा है। ये भी एक कारण है कि उसने तुरंत ट्रेड डील की।
ये तमाम बिंदु अमेरिका का भारत के साथ ट्रेड डील करने के कारण हो सकते हैं। हालांकि कि भारत सरकार की तरफ से स्पष्ट नहीं किया गया है कि अमेरिका के साथ उसने यह डील क्यों की है। बीजेपी नेता जेपी नड्डा का इस पर बयान आया है कि इस विषय पर सरकार विपक्ष के नेताओं के साथ संसद में चर्चा करेगी। लेकिन इसे भारत सरकार की तरफ भारतीय कंपनियों को ऊंचे टैरिफ से राहत दिलाने से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल कहा जा सकता है कि इस डील से दोनों देशों को फायदा होगा। अमेरिका से नजदीकी रिश्तों का सीधा फायदा दिखे ।

