AI University in Amaravati: राजधान दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 चल रहा है। वहीं, दूसरी ओर एक कदम बढ़ाते हुए आंध्र प्रदेश की सरकार ने देश की पहली एआई यूनिवर्सिटी अमरावती में बनाने का ऐलान किया है। करीब 70 एकड़ में बनने वाले इस यूनिवर्सिटी पर 1200 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसके लिए सरकार टॉप चीप मेकर एनवीडिया कंपनी की मदद लेगी। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में 8वीं कक्षा से पीएचडी तक की पढ़ाई होगी। यानी अब देश में नई जेनरेशन का टेक एक्सपर्ट छोटी उम्र से ही तैयार होगा। आइये जानते हैं आज के एक्सप्लेनर में पूरी डिटेल्स।
3 साल बाद होंगे एडमिशन, स्कॉलर भी मिलेगा
यह एआई यूनिवर्सिटी मल्टी सब्जेक्ट मॉडल बेस्ड होगा जो बताता है कि IIT और IIIT से बेहद अलग होगा। सरकार यहां 8वीं कक्षा से पीएचडी तक पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप देगी। सरकार में आईटी सचिव भास्कर कटमनेनी का कहना है कि इस यूनिवर्सिटी के लिए एडमिशन 2029 से शुरू होंगे।
500 से ज्यादा स्टार्टअप्स को होगा फायदा
देश का पहला स्वदेशी लार्ज लैंग्वेज मॉडल इसी एआई यूनिवर्सिटी में बनेगा। ये मॉडल chatGPT और जेमिनाई से अपग्रेडेड होगा। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के जरिए टेक एक्सपर्ट देश-विदेश के 500 से ज्यादा स्टार्टअप्स को मदद करेंगे। रतन टाटा इनोवेशन से यहां स्टूडेंट्स को लाइव इंडस्ट्री प्रोजेक्टस मिलेंगे और इनके सॉल्यूशन के लिए एआई टूल्स भी यहीं डेवलप होंगे।
यूनिवर्सिटी में AI का ऐसा होगा सिलेबस व कोर्स किट
आमतौर पर देश के संस्थानों में सिलेबस थ्योरी बेस्ड डिग्री या कोडिंग बेस्ड होती है लेकिन एआई यूनिवर्सिटी में सिलेबस मल्टी सब्जेक्ट मॉडल होगा। जो प्रोजेक्ट और प्रेक्टिकल बेस्ड होगा। इसके जरिये स्किल को ज्यादा तवज्जो दिया जाएगा। एनवीडिया एआई यूनिवर्सिटी के सिलेबस से लेकर कोर्स किट तैयार करेगी। इसके अलावा एनवीडिया 2 सालों में 10000 से ज्यादा इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को प्रशिक्षित करेगी।
- स्कूल लेवल– स्टूडेंट्स को एआई का बेसिक पढ़ाया जाएगा। साथ ही मशीन लर्निंग, कंप्यूटर विज़न, नेशनल लैंग्वेज प्रोसेसिंग की समझ को डेवलप किया जाएगा।
- कॉलेज लेवल– कॉलेज में स्टूडेंट्स को पढ़ाया कम प्रैक्टिकल ज्यादा एंगेज रहेंगे। यहां तक स्टूडेंट्स नए और अलग तरह के एआई मॉडल बनाएंगे जैसे हेल्थ, मेडिकल, इंजीनियरिंग, लीगल, एग्रीकल्चर और सोशल साइंस शामिल रहेंगे।
- पीएचडी लेवल– स्कूल और ग्रेजुएशन के बाद पीएचडी के स्टूडेंट्स रिसर्च लैब्स में रिसर्च पर फोकस करेंगे। यानी प्यूचर की मशीन को विकसित करना, नए अल्गोरिद्म, लॉन्ग लैंग्वेज मॉडल को डेवलप करना मॉडल होगा।
फ्यूचर में बढ़ेगी भारत की ताकत
देश में एआई यूनिवर्सिटी और एआई समिट के जरिए आने वाले अरबों डॉलर के निवेश भविष्य में एआई के सेक्टर में भारत की ताकत और तस्वीर दोनों बलदेगी। यूनिवर्सिटी से तैयार होने वाले एक्सपर्ट को भारत के भीतर ही एआई सेक्टर मिलेगा जो उसे दूसरे देशों में जाने के बजाय अपने देश में इनोवेशन का मौका मिलेगा। बीते दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट में एआई के सेक्टर में भारत को अमेरिका और चीन की कतार में खड़ा करने ऐलान किया है। इसी कड़ी में कई देश व विदेशी के टेक कारोबारियों ने एआई डेवलप व रिसर्च से लेकर एआई डाटा में अरबों डॉलर निवेश की बात कही। माना जा रहा है कि अगले एक दशक में गौतम अडानी ने 100 अरब डॉलर, मुकेश अंबानी ने 109.8 अरब डॉलर, माइक्रोसॉफ्ट ने साउथ ग्लोबल में 50 अरब डॉलर, एनवीडिया ने 2 अरब डॉलर और YOTTA ने AI हब के लिए 2 अबर डॉलर निवेश का ऐलान किया है।
अगर सबकुछ प्लान के मुताबिक हुआ तो भारत न सिर्फ दुनिया के नक्शे पर एआई के सेक्टर में न सिर्फ पावरहाउस और सुपरपावर बनेगा बल्कि विदेशी एआई कंपनियों के लिए डेवलपर से लेकर टेक एक्सपर्ट तैयार करेगा।
ये भी पढ़ें: India AI Impact Summit 2026: एआई समिट में PM मोदी ने कहा- AI के लिए खुला आसमान जरूरी, ना हो किसी का एकाधिकार

