First Budget of India: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का आम बजट 2026-27 का बजट पेश करेंगी जो अब तक का 9वां बजट होगा। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि देश में बजट पेश करने की परंपरा कब, कैसे और किसने शुरू की थी।
पहला बजट अप्रैल 1860 को पेश हुआ
भारत का पहला बजट आजादी के बाद नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन के दौरान पेश हुआ था। 7 अप्रैल 1860 को जेम्स विल्सन ने भारत का पहला बजट पेश किया था। वे एक स्कॉटिश अर्थशास्त्री थे। आजादी के बाद भारत का पहला सालाना बजट 28 फरवरी 1948 को पेश किया गया। इसे देश के पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने संसद में रखा था।
वाजपेेयी सरकार में शाम की जगह सुबह पेश किया गया बजट
लंबे समय तक बजट पेश करने का समय और तारीख तय रही। साल 1999 तक केंद्रीय बजट फरवरी के आखिरी कार्यदिवस पर शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान यह परंपरा बदली गई। तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बजट का समय बदलकर सुबह 11 बजे कर दिया। तब से बजट सुबह के समय ही पेश किया जाता है।
बजट पर लंबा भाषण सीतारमण का रहा
बजट भाषण की लंबाई भी हमेशा चर्चा में रही है। शब्दों के लिहाज से सबसे लंबा बजट भाषण डॉ मनमोहन सिंह ने दिया था। उन्होंने 1991 के बजट में 18,604 शब्द बोले थे। यह बजट आर्थिक सुधारों के लिए जाना जाता है। 2018 में अरुण जेटली का बजट भाषण भी लगभग इतने ही शब्दों का था। समय के पीरियड के मामले में रिकॉर्ड निर्मला सीतारमण के नाम है। उन्होंने 2020-21 के बजट में दो घंटे 42 मिनट तक भाषण दिया था। यह अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण माना जाता है।
मोरारजी देसाई ने 11 बार पेश किया बजट
निर्मला सीतारमण ने एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। 2024 में वे लगातार सात बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बनीं। 2026 का बजट उनके इस रिकॉर्ड को और आगे बढ़ाएगा। हालांकि सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड अब भी मोरारजी देसाई के नाम है। उन्होंने 1962 से 1969 के बीच कुल 11 बजट पेश किए थे। सबसे छोटा बजट भाषण 1977 में दिया गया था। वित्त मंत्री हिरूभाई मुलजीभाई पटेल ने सिर्फ 800 शब्दों में बजट भाषण समाप्त कर दिया था।
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