होम = Others = दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: महिलाओं की हिम्मत के आगे टूटा सत्ता का घमंड

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: महिलाओं की हिम्मत के आगे टूटा सत्ता का घमंड

by | Sep 9, 2025 | Others, दिल्ली/NCR

Delhi HC News: जम्मू-कश्मीर सरकार के हॉस्पिटैलिटी एंड प्रोटोकॉल विभाग से जुड़े एक मामले में महिला अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अफसर पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। इस प्रकरण पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी की।

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कानून सख्त है, अधिकार मान्य हैं, लेकिन पुरुष मानसिकता में बदलाव अब भी नहीं आया है। सत्ता और पद का दुरुपयोग कर महिलाओं की आवाज दबाने की प्रवृत्ति जारी है।”

जांच और निचली अदालत का रुख

इस मामले में बनी आंतरिक जांच समिति ने आरोपी अधिकारी को क्लीन चिट दे दी थी। दिल्ली पुलिस ने भी दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर केस खत्म करने की कोशिश की।

हालांकि, निचली अदालत ने कहा कि विभागीय जांच और आपराधिक कार्यवाही दोनों अलग-अलग हैं। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 354A और 509 में समन जारी हुआ। सेशन कोर्ट ने भी आरोपी की याचिका खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HC News) में आरोपी ने दलील दी कि यह मामला दुर्भावना से प्रेरित है और महिला के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। मगर अदालत ने इस तर्क को मानने से साफ इनकार कर दिया।

अदालत की टिप्पणी और महत्व

जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि यह वह केस है जहां महिला ने सामाजिक दबाव और सरकारी सिस्टम की बाधाओं के बावजूद हार नहीं मानी और न्याय की लड़ाई जारी रखी। पुलिस द्वारा दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं खोई।

ये भी पढ़े: हिमाचल में प्राकृतिक आपदा का कहर, कुल्लू में भूस्खलन से दो घर मलबे में तब्दील

अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में कोर्ट का दायित्व है कि महिला की आवाज सुने और मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ाए। हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि विभागीय जांच में बरी होना किसी आरोपी को FIR से मुक्त करने का आधार नहीं हो सकता। महिला और गवाहों के बयान ही अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

बंगाल