Tarique Rahman challenges ahead: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में मंगलवार को प्रधानमंत्री के पद शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने पीएम पद की शपथ ली। इसके साथ बांग्लादेश को करीब 35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री बना। इससे पहले अब तक बीएनपी की नेता खालिदा जिया (1991-96), अवामी लीग की नेता शेख हसीना (1996-2001), बीएनपी दोबारा सत्ता में लौटी खालिदा जिया (2001-2006) पीएम बनी। वर्ष 2006 में हुए चुनावों में शेख हसीना दोबारा पीएम बनी और उसके बाद हुए चुनावों में 2024 तक सत्ता में रही। यानी 3 दशक से ज्यादा वक्त बांग्लादेश की बागडोर एक महिला पीएम के हाथ में रही। ऐसे में पहली बार पीएम बन रहे बीएनपीए नेता तारिक रहमान के सामने सरकार चलाने से लेकर पड़ोसी देशों संग संबंधों को लेकर उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। आइये जानते हैं आज के एक्सप्लेनर में उनके सामने कौन-कौन सी चुनौतियां होंगी।
PM तारिक के सामने ये चुनौतियां
- अर्थव्यवस्था की सेहत बेहद नाजुक और कमजोर है।
- कानून-व्यवस्था बहाल और धार्मिक हिंसा रोकना
- भारत संग संबंधों को ट्रैक पर लाना और संतुलन बनाना
- पाकिस्तान और ISI के बढ़ते प्रभाव को रोकना
- चीन के बढ़ते दखल को कम करना
अर्थव्यवस्था की सेहत बेहद नाजुक और कमजोर है।
तारिक रहमान की प्राथमिकता बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को स्थिर और उसमें सुधार करना प्रातमिकता होगी। आज से 4 साल पहले माना जा रहा था बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की तुलना भारत की अर्थव्यवस्था की जा रही थी। लेकिन देश में राजनैतिक अस्थिरता और धार्मिक हिंसा ने बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को पटरी से उतार है। रिपोर्ट है कि पिछले एक साल में बांग्लादेश पर 14 प्रतिशत कर्ज बढ़ा है और अर्थव्यवस्ता की विकास दर 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
कानून-व्यवस्था बहाल और धार्मिक हिंसा रोकना
बांग्लादेश में राजनैतिक अस्थिरता के चलते पूरे देश में कानून व्यवस्था बिगड़ी है और धार्मिक हिंसा ने वैश्विक स्तर पर बांग्लादेश की छवि को नुकसान पहुंचाया है। पिछले 17 महीनों में अंतरिम सरकार के कार्यकाल में 45 लोगों की मौत एक्स्ट्रा-जुडिशियल किलिंग में हुई और 122 लोगों की मौत जेल हिरासत में हुई। मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़कर 413 हो गई। इस दौरान करीब 260 लोगों की मौत हुई। 2024-26 के बीच हिंसक घटनाओं में 7000 लोग घायल हुए हैं।
भारत संग संबंधों को ट्रैक पर लाना और संतुलन बनाना
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसक घटनाओं पर भारत ने नाराजगी जताई। इसके बाद बांग्लादेश ने भारत में टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने से इनकार दिए। नतीजा रहा कि बांग्लादेश को स्कॉटलैंड से रिप्लेस किया गया। बीते दिन मोहम्मद युनूस ने अपने विदाई भाषण में भारत के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स को जोड़ते हुए भविष्य के आर्थिक एकीकरण की बात की। इसमें सेवन सिस्टर्स शब्द को भारत के नॉर्थ ईस्ट राज्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। ऐसे में तारिक के सामने भारत-बांग्लादेश रिश्ते को ट्रैक पर लाने की जिम्मेदारी होगी और दोबारा व्यापार को बढ़ावा देना चाहेंगे।
पाकिस्तान और ISI के बढ़ते प्रभाव को रोकना
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के रहने के बावजूद वहां पाकिस्तान और आईएसआई संगठन का प्रभाव बढ़ा। नतीजा रहा कि वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया गया। संसदीय चुनावों में वोटरों ने बीएनपी के पक्ष में प्रचंड वोटिंग की। परिणाम रहा की बीएनपी ने 209 सीटों पर जीत दर्ज की। जमात ए इस्लामी गठबंधन ने 77 सीटों पर जीत दर्ज की। ये बताता है कि लोग कट्टरपंथी सरकार नहीं चाहते बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों वाली सरकार चाहते हैं। तारिक इस बहुमत को समझेंगे और देश में ऐसी शक्तियों पर नकेल लगाएंगे जो बांग्लादेश के हितों को नुकसान ना पहुंचाए।
चीन के बढ़ते दखल को कम करना
बांग्लादेश में जेन जी आंदोलन के बाद से वहां चीन ने तेजी से अपना प्रभाव बढ़ाया है। यहां तक बांग्लादेश और चीन में रक्षा सौदे भी हुए। चीन का यहां भारत के बॉर्डर के पास ड्रोन फैक्ट्री बनाने का प्लान है। बांग्लादेश में चीन के दखल से न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका ने चिंता जाहिर की है। यही वजह कि हाल ही में अमेरिका ने बांग्लादेश पर टैरिफ घटाया है। ऐसे बांग्लादेश कभी नहीं चाहेगा कि वह अमेरिका के खिलाफ कदम बढ़ाए तो तारिक रहमान के सामने चीन के दखल को संतुलित कर बांग्लादेश के हितों पर काम करने की प्राथमिकता होगी।
इन तमाम बिंदुओं पर बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान काम करना जरूर चाहेंगे। इसकी झलक चुनावी नतीजे आने के बाद तारिक रहमान के विपक्षी नेताओं के घर जाकर मुलाकात से जोड़कर देखा जा सकता है। उनके शपथ समाराेह के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को निमंत्रण से समझा जा सकता है। पडो़सी होने के नाते भारत भी चाहेगा है कि बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल हो और वहां की सरकार एक बार फिर से आमजन का भरोसा पाए।
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