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‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल पाकिस्तान पर किन-किन का कर्ज़ है बकाया?

Pakistan outstanding loans: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाज़ा में संघर्ष समाप्त करने को लेकर प्रस्तावित बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने को लेकर पाकिस्तान ने सहमति जताई है। ट्रंप के इस प्रस्तावित योजना के मुताबिक, एक अरब डॉलर की आर्थिक मदद करने वाला देश ही बोर्ड ऑफ पीस का स्थाई सदस्य बन सकता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है क्या पाकिस्तान इस योजना का स्थाई सदस्य बनेगा या नहीं। क्यों कि पाकिस्तान की आर्थिक हालत बेहद नाजुक है। ऐसे में जानना जरूरी है कि पास्किस्तान पर कितना और किन-किन संस्थानों व देशों का कर्जा है।

पाकिस्तान पर 103 लाख करोड़ का कर्जा

पिछले 12 वर्षों में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज लगभग डबल हो चुका है। साल 2011 में जहां उस पर करीब 66.4 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज था, वहीं 2023 की रिपोर्ट की मानें तो यह बढ़कर 124.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारतीय मुद्रा में देखें तो यह आंकड़ा 103 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा होता है।

IMF का पाकिस्तान पर कर्ज ?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ पाकिस्तान के लिए मुश्किल समय में सहारा बना। साल 2023 में IMF ने पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज दिया था। इसके बाद मार्च 2024 में जलवायु परिवर्तन से निपटने और आर्थिक मजबूती के लिए 1.3 अरब डॉलर की अतिरिक्त मदद दी गई।

ADB पाकिस्ता का कर्जदाता

एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) भी पाकिस्तान का बड़ा कर्जदाता है। दिसंबर 2024 तक ADB ने पाकिस्तान को लोन, अनुदान और तकनीकी सहायता के तहत कुल 43.4 अरब डॉलर देने का वादा किया था। फिलहाल ADB के पोर्टफोलियो में पाकिस्तान के लिए 53 लोन और 3 अनुदान शामिल हैं, जिनकी कुल राशि 9.13 अरब डॉलर है।

चीन ने पाक को सबसे ज्यादा कर्ज दिया

द्विपक्षीय कर्ज देने के मामले में चीन पहले नंबर पर है। पाकिस्तान के द्विपक्षीय कर्ज का करीब 57.9 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान पर चीन का करीब 12.27 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।

यूएस, जर्मनी, सऊदी अरब व अन्य देशों से कर्ज

एक समय पाकिस्तान का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब अब निवेश के मामले में दूरी बनाता नजर आ रहा है। कर्ज देने के मामले में जापान पहले, चीन दूसरे और सऊदी अरब तीसरे स्थान पर है। जापान ने पाकिस्तान को करीब 3.48 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया है, जबकि सऊदी अरब से लिया गया उधार लगभग 1.49 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका ने भी पाकिस्तान को बड़ी रकम उधार दी है।

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