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India EU Trade Deal: भारत-EU व्यापार समझौता, इन छह सेक्टर और राज्यों को मिलेगा बड़ा निर्यात लाभ

India EU Trade Deal: भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए व्यापार समझौते से देश के छह प्रमुख सेक्टर और छह से अधिक राज्यों को फायदा होने की उम्मीद है। इन सभी सेक्टरों में एमएसएमई की 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। समझौते के लागू होने से निर्यात बढ़ने और स्थानीय उद्योगों को नई संभावनाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

टेक्सटाइल सेक्टर

    ईयू में भारतीय टेक्सटाइल पर वर्तमान में 12 प्रतिशत शुल्क लगता है। समझौते के बाद यह शुल्क शून्य हो जाएगा। ईयू सालाना 263 अरब डॉलर का टेक्सटाइल आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी मात्र 7.2 अरब डॉलर की है। इस अवसर से पंजाब के लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों के गारमेंट और स्पोर्ट्स गुड्स उद्योग को निर्यात बढ़ाने का मौका मिलेगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग आइटम्स पर भी इसका लाभ होगा।

    केमिकल्स और फार्मा

      केमिकल्स पर ईयू में वर्तमान में 13 प्रतिशत शुल्क है। फार्मा और केमिकल्स पर 3-5 प्रतिशत शुल्क लगता है, जिसे अब शून्य कर दिया जाएगा। ईयू सालाना 500 अरब डॉलर के केमिकल्स और फार्मा का आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 10 अरब डॉलर है। गुजरात के भरूच और वडोदरा के केमिकल उद्योग इससे लाभान्वित होंगे।

      प्लास्टिक और रबर

        ईयू सालाना 317 अरब डॉलर के प्लास्टिक और रबर का आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.4 अरब डॉलर है। वर्तमान में 6 प्रतिशत शुल्क लगता है, जिसे अब शून्य कर दिया जाएगा।

        लेदर फुटवियर

          लेदर फुटवियर पर ईयू में वर्तमान में 17 प्रतिशत शुल्क है। समझौते के बाद यह शुल्क शून्य होगा। भारत की हिस्सेदारी केवल 2.4 अरब डॉलर है। उत्तर प्रदेश के कानपुर, आगरा और सहारनपुर के उद्योग इससे सीधे लाभान्वित होंगे।

          समुद्री उत्पाद

            भारतीय समुद्री उत्पादों पर ईयू में वर्तमान में 26 प्रतिशत शुल्क लगता है। समझौते के बाद यह शुल्क खत्म हो जाएगा। भारत का निर्यात केवल 1 अरब डॉलर है, जबकि ईयू सालाना 53 अरब डॉलर का समुद्री उत्पाद आयात करता है। बंगाल और आंध्र प्रदेश के निर्यातकों को इससे लाभ मिलेगा।

            जेम्स और ज्वैलरी

              जेम्स और ज्वैलरी पर ईयू में 4 प्रतिशत शुल्क है। भारत की हिस्सेदारी केवल 2.7 अरब डॉलर है, जबकि ईयू सालाना 79.2 अरब डॉलर का जेम्स एवं ज्वैलरी आयात करता है। गुजरात के सूरत और राजस्थान के हैंडीक्राफ्ट्स उद्योग को इससे फायदा होगा।

              भारत में ईयू उत्पादों पर शुल्क में कमी

              वाइन पर 150 प्रतिशत शुल्क 7-10 वर्षों में 30 प्रतिशत तक घटाया जाएगा।

              शराब पर 150 प्रतिशत शुल्क 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।

              बीयर पर 110 प्रतिशत शुल्क घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा।

              ईयू की कारों पर 100-125 प्रतिशत शुल्क अगले सात वर्षों में 10 प्रतिशत तक घटेगा, लेकिन केवल 2.5 लाख कारों के लिए।

              सीबैम पर चर्चा

              ईयू ने कार्बन बार्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबैम) लागू कर दिया है। भारत ने इसका हटवाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। मुख्य प्रभाव स्टील और एल्युमीनियम के निर्यात पर पड़ेगा।

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