Baramati Assembly Seat: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया। इस दुर्घटना में चार अन्य लोगों की भी जान गई। अजित पवार के निधन के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है, खासकर उनके गढ़ बारामती विधानसभा क्षेत्र में, जहां वे साढ़े तीन दशक तक अजेय रहे। अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा।
बारामती: पवार परिवा गढ़
बारामती विधानसभा सीट को लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। 1967 से लेकर 1991 तक यह सीट शरद पवार के अधीन रही। 1991 में शरद पवार के लोकसभा जाने के बाद अजित पवार ने यहां लगातार जीत हासिल की और अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया। उनके खिलाफ चुनाव में कभी कोई चुनौती पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई, चाहे वह परिवार का कोई सदस्य ही क्यों न रहा हो।
बारामती सीट का राजनीतिक इतिहास
शुरुआती दौर (1952-1962)
1952: गुलाबराव मुलिक (कांग्रेस)
1957: नानासाहेब जगताप (पीडब्ल्यूपी)
1962: मालतीबाई शिरोले (कांग्रेस)
शरद पवार युग (1967-1991)
शरद पवार ने 1967 में पहली बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 1972, 1978, 1980, 1985 और 1990 में लगातार विजयी रहे।
अजित पवार युग की शुरुआत (1991-1994)
अजित पवार ने 1991 के उपचुनाव में पहली बार बारामती से जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज की।
2024 का ‘पवार बनाम पवार’ मुकाबला
2024 में राकांपा विभाजन के बाद, अजित पवार का मुकाबला उनके भतीजे युगेंद्र पवार से हुआ। अजित पवार ने 1,00,899 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
अजित पवार की विरासत संभालने के दावेदार
बारामती में अजित पवार की विरासत पर कई नाम उभरकर सामने आए हैं। इनमें उनकी पत्नी, बेटे और भतीजे शामिल हैं।
सुनेत्रा पवार
अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद, बारामती में अपनी राजनीतिक मौजूदगी और टेक्सटाइल कंपनी अध्यक्षता के कारण प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं।
पार्थ पवार
बड़े बेटे पार्थ को संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, वह राजनीति में कम सक्रिय रहे हैं। 2019 में मावल से चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए।
जय पवार
छोटे बेटे जय पवार ने अभी तक चुनावी राजनीति में कदम नहीं रखा है, लेकिन हाल ही में ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर जनता से जुड़े हैं। इसे उनके ‘सॉफ्ट-लॉन्च’ के तौर पर देखा जा रहा है।
रोहित पवार
शरद पवार के पोते और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार भी राजनीतिक उभरते सितारे माने जाते हैं। 2024 में कर्जत-जामखेड सीट पर जीत हासिल की। भविष्य में बारामती से राजनीति करने की संभावनाएं चर्चा में हैं।
युगेंद्र पवार
अजित पवार के भतीजे और शरद पवार गुट के नेता। 2024 में अजित के खिलाफ चुनाव लड़ा और बड़ी वोट संख्या हासिल की। उन्हें बारामती में भविष्य का नेता तैयार किया जा रहा है।
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