Naveen Jindal salary decision: मौजूदा लोकसभा में केवल दो सांसद ऐसे हैं जिन्होंने अपने पद का वेतन लेने से इनकार किया है। आमतौर पर वेतन और भत्तों में वृद्धि के मुद्दे पर सांसद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट दिखाई देते हैं, लेकिन इन दो सांसदों ने एक अलग उदाहरण पेश किया है। ये दोनों सांसद देश के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके चुनाव क्षेत्रों के बीच लगभग 2,575 किलोमीटर की दूरी है। यह दूरी लगभग कुरूश्रेत्र और इंफाल के बीच की दूरी के बराबर है।
बीजेपी और कांग्रेस के सांसद शामिल
आरटीआई के अनुसार, वेतन न लेने वाले सांसदों में बीजेपी के नवीन जिंदल और कांग्रेस के बिमल अकिज़म शामिल हैं। नवीन जिंदल हरियाणा के कुरुक्षेत्र से सांसद हैं, जबकि बिमोल अकोइजम मणिपुर के इनर मणिपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। दोनों सांसदों ने अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर वेतन लेने से इनकार किया है।
नवीन जिंदल ने भत्ते भी लेने से मना किया
इन दोनों सांसदों में एक कदम आगे बढ़ते हुए नवीन जिंदल ने केवल वेतन ही नहीं बल्कि सांसद पद से मिलने वाले सरकारी भत्तों और अन्य सुविधाओं का लाभ भी नहीं लेने का फैसला किया है। आमतौर पर सांसदों को वेतन के साथ कई प्रकार के भत्ते, आवास और अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं, लेकिन जिंदल ने इन सबको छोड़ने का विकल्प चुना है।
आर्थिक पृष्ठभूमि में बड़ा अंतर
इन दोनों सांसदों की आर्थिक स्थिति में काफी अंतर है। चुनावी हलफनामों के अनुसार, नवीन जिंदल ने अपनी कुल संपत्ति लगभग 1,241 करोड़ रुपये घोषित की है। वहीं, बिमोल अकोइजम ने लगभग 97 लाख रुपये की संपत्ति बताई है। इसके बावजूद दोनों सांसदों ने वेतन न लेने का निर्णय लिया, जो भारतीय राजनीति में एक असामान्य उदाहरण माना जा रहा है।
लोकसभा के सबसे अमीर सांसद
हालांकि नवीन जिंदल लोकसभा के सबसे धनी सांसदों में शामिल हैं, लेकिन वे सबसे अमीर नहीं हैं। यह स्थान चंद्रशेखर पेम्मासानी के पास है, जो आंध्र प्रदेश के गुंटूर से तेलुगु देशम पार्टी के सांसद हैं। उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में 5,705 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। इसके बाद दूसरे स्थान पर बीजेपी सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी हैं, जिन्होंने लगभग 4,568 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है।
लोकसभा में वेतन पाने वाले सांसदों की स्थिति
लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, इनमें से 481 सांसदों को वेतन मिल रहा है। हालांकि शेष सांसदों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है कि उन्होंने वेतन लिया है या नहीं। वर्तमान में लोकसभा की दो सीटें खाली भी हैं, जिसके कारण कुल सक्रिय सांसदों की संख्या थोड़ी कम है।
अलग संदेश देने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वेतन न लेने का निर्णय एक प्रतीकात्मक कदम भी हो सकता है, जिससे जनता के बीच अलग संदेश जाता है। यह कदम दिखाता है कि कुछ सांसद व्यक्तिगत कारणों या सिद्धांतों के आधार पर सरकारी वेतन लेने से बचने का फैसला करते हैं। हालांकि यह संख्या बहुत कम है, लेकिन यह उदाहरण भारतीय राजनीति में एक अलग दृष्टिकोण को भी दर्शाता है, जहां जनप्रतिनिधि अपने पद के साथ मिलने वाली आर्थिक सुविधाओं को छोड़ने का फैसला करते हैं।

