US Israel Iran airstrikes: अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए हैं, जिससे देश में सुरक्षा स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में कई लोगों की जानें चली गई हैं और नागरिकों में डर और अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। हमला विशेष रूप से दक्षिणी ईरान के कुछ क्षेत्रों में केंद्रित था।
स्कूल पर हमला, पांच छात्राओं की मौत
दक्षिणी ईरान के एक स्कूल को निशाना बनाते हुए हुए हमले में 85 छात्राओं की मौत हो गई। इस हमले ने स्थानीय समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश पैदा कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि इस स्कूल में बच्चे और युवा छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही मौजूद थी, लेकिन हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसे बचाया नहीं जा सका। स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं और मृतकों के परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है। इस हमले ने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागरिक प्रभावित, हड़कंप का माहौल
हमलों के बाद आसपास के क्षेत्रों में नागरिकों में भय का माहौल है। लोग घरों में छिपे हुए हैं और आपातकालीन सेवाओं ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। अस्पतालों और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में घायलों को भर्ती किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हवाई हमले का उद्देश्य ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना था, लेकिन इसका व्यापक प्रभाव नागरिक क्षेत्रों और स्कूलों तक पहुंचा है।
अमेरिका और इज़राइल का बयान
अमेरिका और इजराइल के अधिकारियों ने हमले की पुष्टि की है। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान के सुरक्षा ढांचे और संभावित परमाणु कार्यक्रमों को क्षतिग्रस्त करना था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक थी। इज़राइल ने भी हमले को ‘पूर्वव्यापी और रणनीतिक कदम’ बताया।
ईरान की प्रतिक्रिया
हमलों के तुरंत बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ईरानी सशस्त्र बलों ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाई और अपने हवाई क्षेत्र में सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस हमले का परिणाम गंभीर होगा और उन्होंने अमेरिका और इज़राइल को चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की सुरक्षा उल्लंघन की प्रतिक्रिया तय है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता
इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर न केवल ईरान और मध्य पूर्व पर, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिक क्षेत्रों पर हमला न करने का आग्रह किया है। सुरक्षा विश्लेषक यह भी कहते हैं कि शिक्षा संस्थानों और नागरिक बस्तियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के नुकसान से बचा जा सके।
इस तरह अमेरिका और इज़राइल के हमलों ने ईरान में गंभीर हताहत और व्यापक अस्थिरता पैदा कर दी है। स्कूल पर हमला और बच्चों की मौत ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मध्य पूर्व में यह घटनाक्रम आगे बढ़ते संघर्ष और सुरक्षा संकट का संकेत देता है।

