Iran Israel war: ईरान और इज़रायल के बीच जारी संघर्ष अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव गहराता जा रहा है। इस बीच ईरान की ओर से बड़े दावे किए गए हैं, जिन्होंने हालात को और गंभीर बना दिया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय पर हमले का दावा
ईरान की सैन्य इकाई IRGC ने बयान जारी कर दावा किया है कि उसने इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय को निशाना बनाया है। IRGC के अनुसार यह कार्रवाई उसके सैन्य अभियान ‘ऑपरेशनल ट्रुथ प्रॉमिस 4’ के तहत की गई। बयान में कहा गया है कि अचानक किए गए मिसाइल हमलों में प्रधानमंत्री कार्यालय और इज़रायली वायुसेना कमांडर के दफ्तर को लक्ष्य बनाया गया।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इज़रायल की ओर से इस हमले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईरान ने अपने बयान में नेतन्याहू को ‘आपराधिक प्रधानमंत्री’ बताते हुए कहा कि उसके हमले विशेष रूप से सरकारी परिसरों पर केंद्रित थे।
‘ट्रुथ प्रॉमिस 4’ अभियान क्या है?
IRGC ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई उसके नए सैन्य चरण का हिस्सा है। ‘ऑपरेशनल ट्रुथ प्रॉमिस 4’ के तहत इज़रायल के महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की रणनीति अपनाई गई है। ईरान का दावा है कि हमले बेहद सटीक थे और उनके परिणामों की विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नामकरण ईरान की ओर से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। ऐसे अभियानों का उद्देश्य केवल सैन्य क्षति पहुंचाना ही नहीं, बल्कि विरोधी देश के राजनीतिक नेतृत्व पर दबाव बनाना भी होता है।
खामेनेई की मौत के बाद बदले हालात
संघर्ष की हालिया घटनाएं बेहद अहम हैं। इज़रायल द्वारा तेहरान में किए गए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के मारे जाने की खबर ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। ईरानी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की, जिसके बाद देशभर में आक्रोश फैल गया।
खामेनेई की मौत के बाद IRGC की भूमिका और अधिक आक्रामक होती दिख रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अब कई रणनीतिक फैसले सीधे IRGC के नेतृत्व में लिए जा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने संकेत दिया कि कुछ सैन्य कार्रवाइयाँ उनकी प्राथमिकता में नहीं थीं, जिससे यह अटकलें तेज हो गईं कि सैन्य नेतृत्व स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहा है।
लगातार बढ़ता सैन्य टकराव
संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुए हमलों से मानी जा रही है, जब अमेरिका और इज़रायल ने मिलकर ईरान पर कार्रवाई की। शुरुआती हमलों के बाद से दोनों देशों के बीच मिसाइलों और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है। ईरान ने इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है, जबकि इज़रायल का दावा है कि उसके हमलों में खामेनेई सहित कई शीर्ष कमांडर मारे गए हैं।
तीन दिनों से जारी इस जंग ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के रुख में कोई नरमी दिखाई नहीं दे रही। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

