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India-US Trade Deal: टैरिफ घटाने वाली डील पर बड़ा खुलासा, पीयूष गोयल ने दी भारत-अमेरिका समझौते की तारीख

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने व्यापार के क्षेत्र में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान (Joint Statement) तैयार करना शुरू कर दिया है, जिसमें इस हाई-प्रोफाइल ट्रेड डील की पूरी रूपरेखा शामिल होगी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस बात की जानकारी दी। उनका कहना है कि यह बयान अगले चार-पांच दिन या उससे पहले जारी किया जा सकता है।

इस समझौते के लागू होने के दो दिन बाद अमेरिका की ओर से एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर आने की उम्मीद है, जिसके तहत भारतीय सामान पर लगने वाला कुल 50 प्रतिशत टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा।

संयुक्त बयान से शुरू होगी प्रक्रिया

पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “हमारी द्विपक्षीय बातचीत अच्छी स्थिति में है। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की पहली रूपरेखा लगभग तैयार है। हमें उम्मीद है कि अगले चार-पांच दिन में या उससे पहले संयुक्त बयान जारी हो जाएगा और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।”

उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान के बाद अमेरिका भारत पर लगे 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ (कुल 50 प्रतिशत) को घटाकर 18 प्रतिशत कर सकता है। इसके बाद औपचारिक ड्राफ्ट एग्रीमेंट तैयार होगा, जिस पर मध्य मार्च में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर होने की संभावना है।

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से लागू होगा नया टैरिफ

पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि 18 प्रतिशत टैरिफ अमेरिका के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद ही लागू होगा। उन्होंने कहा, “संयुक्त बयान आने के लगभग दो दिन बाद यह ऑर्डर जारी किया जा सकता है। हमने पूरी प्रक्रिया को तेज रखा है।”

किन सेक्टरों को मिलेगा लाभ

इस डील से भारत के करीब 30 अरब डॉलर के लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट को फायदा मिलेगा। इसमें टेक्सटाइल, रेडीमेड कपड़े, लेदर प्रोडक्ट्स, जूते-चप्पल, समुद्री उत्पाद और MSME सेक्टर शामिल हैं। इस टैरिफ कटौती से इन उत्पादों की अमेरिका में बिक्री में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

आगे की प्रक्रिया पर वाणिज्य सचिव का बयान

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि संयुक्त बयान जारी होना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसके बाद इसे कानूनी समझौते में बदला जाएगा और वही लागू होगा। उन्होंने साफ किया कि भारत की तरफ से टैरिफ में कटौती तभी होगी जब कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे, क्योंकि भारत में टैरिफ MFN सिस्टम के तहत हैं। वहीं, अमेरिका में यह कटौती एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए तुरंत की जा सकती है।

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