Former Union home minister: यूपीए सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम ने वित्त वर्ष 2026-27 बजट को लेकर सरकार की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट भाषण सुनकर नहीं लगता कि उन्होंने इकॉनोमिक सर्वे को ध्यान में रखकर बजट पेश किया है। साथ ही कहा कि सरकार की आर्थिक नीति दूरदर्शिता की कामी हैं।
चिदंबरम ने सरकार को गिनाई आर्थिक चुनौतियां
- अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से निर्यातकों पर दबाव है
- लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संघर्ष निवेश पर बोझ डालेंगे।
- बढ़ता हुआ व्यापार घाटा, विशेष रूप से चीन के साथ
- सकल स्थिर पूंजी निर्माण का कम स्तर और निजी क्षेत्र की निवेश करने में संकोच
- भारत में FDI के प्रवाह से निश्चित दृष्टिकोण और पिछले कई महीनों से FPI का लगातार बाहर जाना
- राजकोषीय समेकन की बेहद धीमी गति और FRBM के विपरीत लगातार ऊंचा राजकोषीय घाटा और राजस्व घाटा
- आधिकारिक रूप से घोषित मुद्रास्फीति के आँकड़ों और घरेलू खर्च, शिक्षा व स्वास्थ्य के वास्तविक बिलों के बीच लगातार बना रहने वाला अंतर
- लाखों MSMEs का बंद होना और बचे हुए MSMEs का अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष
- रोज़गार की अस्थिर स्थिति, विशेष रूप से युवाओं में बेरोज़गारी
- नगरपालिकाओं और नगर निगमों में बिगड़ता बुनियादी ढांचा।
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सरकार अपनी घोषित योजना को भुला देती है: चिदंबरम
बजट भाषण की सबसे गंभीर आलोचना यह है कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों, संस्थानों, इनिशिएटिव, फंडों, समितियों, हब्स आदि की संख्या बढ़ाते जाने से थकते नहीं हैं। मैंने कम से कम 24 की गिनती की है। मैं आपकी कल्पना पर छोड़ता हूँ कि इनमें से कितने अगले साल तक भुला दिए जाएंगे और गायब हो जाएंगे।
चिदंबरम ने केंद्र पर लगाया तमिलनाडु संग सौतेला रवैया का आरोप
चिदंबरम ने बजट को लेकर केंद्र सरकार पर तमिलनाडु संग सौतेला रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बजट में तमिलनाडु के लिए योजनाओं की अनदेखी की गई है। साथ ही कहा कि राज्य में बीजेपी का कोई वर्चस्व नहीं है इसलिए भी केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया।
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