Middle East tension: मध्य पूर्व में तेज होते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि मौजूदा अभियान की तुलना इराक युद्ध से करना गलत है। उनके मुताबिक, वाशिंगटन किसी लंबे और अंतहीन संघर्ष में उलझने नहीं जा रहा, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमताओं और परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करने के लिए सीमित लेकिन निर्णायक कदम उठा रहा है।
यह इराक जैसा युद्ध नहीं
हेगसेथ ने कहा कि यह अभियान कब्जे या राष्ट्र निर्माण के लिए नहीं चलाया जा रहा। उनका जोर इस बात पर रहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की मिसाइल प्रणाली, ड्रोन नेटवर्क, नौसैनिक ताकत और परमाणु ढांचे को निशाना बनाना है। उन्होंने कहा कि हमले सटीक, व्यापक और रणनीतिक हैं, जिनका मकसद तत्काल प्रभाव पैदा करना है।
उनके अनुसार, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें, समुद्री मार्गों पर खतरा और परमाणु गतिविधियां अब वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान पारंपरिक सैन्य गतिविधियों की आड़ में अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ा रहा था।
सत्ता परिवर्तन के दावों पर सफाई
रक्षा सचिव ने इस बात से इनकार किया कि यह अभियान शासन परिवर्तन के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा घटनाक्रम के परिणामस्वरूप नेतृत्व स्तर पर बदलाव हुए हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लाभ हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह संघर्ष शुरू नहीं किया, लेकिन अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इसे निर्णायक रूप से समाप्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है। हेगसेथ ने ट्रम्प के उस रुख का समर्थन किया जिसमें कहा गया है कि ईरान जैसे कट्टरपंथी शासन को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
समयसीमा पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति का
अभियान कितने समय तक चलेगा, इस सवाल पर हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि इसकी कोई तय अवधि नहीं है। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई की अवधि और दिशा को लेकर अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रम्प ही लेंगे।
उन्होंने इस संघर्ष को अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने तनाव की परिणति बताया। उनके अनुसार, यह कार्रवाई प्रतिरोधात्मक है और इसका उद्देश्य भविष्य में बड़े खतरे को टालना है।
क्षेत्रीय संघर्ष का विस्तार
अमेरिका और इज़रायल द्वारा समन्वित हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े। रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अवी खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इज़रायल, खाड़ी देशों और पश्चिमी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए।
लेबनान स्थित संगठन हिजबुल्लाह ने भी इज़रायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसके जवाब में इज़रायली सेना ने बेरूत के दक्षिणी इलाकों पर तीव्र हवाई हमले किए। संघर्ष अब कई मोर्चों पर फैल चुका है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है।
परमाणु कार्यक्रम मुख्य लक्ष्य
वॉशिंगटन और इज़रायल का कहना है कि इस अभियान का केंद्रीय उद्देश्य ईरान की आक्रामक क्षमता को समाप्त करना और उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि यदि ईरान को रोका नहीं गया, तो इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ और बढ़ सकती है।
तेजी से बदलते हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय संयम और संवाद की अपील कर रहा है। हालांकि जमीनी स्तर पर हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है, जिससे मध्य पूर्व एक व्यापक और जटिल संघर्ष की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

