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कौन हैं एलिन जिनका PM मोदी ने ‘मन की बात’ में किया जिक्र; आइये जानते हैं एलिन ने जाते-जाते कैसे बचाई जिंदगियां

by | Feb 22, 2026 | Explainer, News Featured

Aalin Become Kerala’s youngest organ donor: 10 माह की मसूम एलिन शेरिन अब्राहम को डॉक्टरों ने ब्रेन डैड बताया। दरअसल, 5 फरवरी को केरल में पल्लम-बोर्मा जंक्शन के पास एमसी रोड पर शेरिन अपनी मां और नाना-नानी के साथ कार से जा रही थी। जो सड़क हादसे का शिकार हो गई। कोचि के निजी अस्पतला में डॉक्टरों ने ट्रीटमेंट के दौरान 13 फरवरी को एलिन को ब्रेड डैड घोषित कर दिया। पीड़ित पैरेंट्स ने एलिन के ऑर्गन डोनेट करने के लिए एक संस्था से संपर्क किया। आइये जानते हैं ऑर्गन डोनेट क्यों जरूरी है और भारत सरकार ने कौन सी मुहिम चलाई हुई है।

PM मोदी ने ‘मन की बात’ में एलिन का किया जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 131वें एपिसोड में एलिन शेरिन को याद किया। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले हमने नन्ही मासूम एलिन शेरिन अब्राहम को खो दिया है। कल्पना कीजिए- उसके सामने पूरी जिंदगी थी, जो अचानक खत्म हो गई। कितने ही सपने और खुशियां अधूरी रह गई। उसके पैरेंट्स जिस पीड़ा से गुजर रहे होंगे, उसे शब्दों से व्यक्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन इतने गहरे दर्द के बीच भी आलिन के पिता अरुण अब्राहम और मां शेरिन ने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे हर देशवासी का हृदय उनके प्रति सम्मान से भर गया है।

एलिन के पैरेंट्स के फैसलो के PM मोदी ने सराहा

पीएम मोदी ने एलिन के माता-पिता के ऑर्गन डोनेट के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा इस फैसले से पता चलता है कि उनकी सोच कितनी बड़ी है और व्यक्तित्व कितना विशाल। एक तरफ वे अपनी बच्ची को खोने के शोक में डूबे थे, तो वहीं दूसरों की मदद का भाव भी उनमें भरा था। वे चाहते थे कि किसी भी परिवार को ऐसा दिन देखना ना पड़े और लोग असाधारण कार्य कर रहे हैं।

किस अस्पताल को एलिन का कौन सा ऑर्गन हुआ डोनेट

एलिन केरल में सबसे कम उम्र में ऑर्गन डोनेट करने वाली पहली शख्स बन गई हैं। एलिन का हार्ट वाल्व्स एससीटीआईएमएसटी को, लिवर केआईएमएस अस्पताल को, किडनी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और आंखे अमृता हॉस्पिटल के आई बैंक को डोनेट किया गया है। ये सभी ऑर्गन जरूरतमंद मरीजों को दिए जाएंगे।

ऑर्गन डोनेशन क्यों जरूरी है?

ऑर्गन डोनेशन को इंसानियत का सबसे बड़ा गिफ्ट माना जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक सिंगल डोनर 8 जिंदगियां बचा सकता है। देश में हर साल लाखों लोग ऑर्गन ना मिलने के चलते जान गंवा देते हैं। अगर ऑर्गन सही वक्त पर उपलब्ध हो जाए तो ये मौतें रुक सकती है। इसके लिए सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है। ऑर्गन डोनेशन में तेजी आने से देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ ऑर्गन ट्रांसप्लांट नेटवर्क मजबूत होगा।

10 सालों में 4 गुना बढ़ा ऑर्गन डोनेशन

आंकड़े बताते हैं कि भारत में पिछले 10 सालों में ऑर्गन डोनेशन 4 गुना तेजी से बढ़ें हैं। साल 2013 में कुल‎ डोनर 4990 थे, वहीं 2023 में यह ‎बढ़कर 17168 हाे गए। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन प्रतिज्ञा वेबसाइट के 2023 में शुरू होने के बाद से 3.30 लाख से अधिक लोगों ने ऑर्गन डोनेट का रजिस्ट्रेशन कराया है।

इन घंटों में ऑर्गन डोनेट माना जाता है सुरक्षित

डॉक्टरों के मुताबिक, किसी व्यक्ति की आकस्मिक मौत के बाद हार्ट, लिवर, किडनी, इंटेस्टाइन और पैंक्रियाज जैसे ऑर्गन कुछ घंटों के भीतर दान किया जा सकता है। जैसे हार्ट को 4-6 घंटे, लिवर को 6-12 घंटे, इंटेस्टाइन व पैंक्रियाज को 6-6 घंटे और किडनी को 30 घंटे के भीतर दान किया जा सकता है।

ऑर्गन डोनेशन के लिए कौन सा है कानून

ऑर्गन डोनेशन को लेकर नियम बने हुए है। भारत सरकार ने ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एंड टिशूज एक्ट-1994 बनाया हुआ है। जो कानून जीवन बचाने के लिए मानव अंगों के सर्जिकल रिमूवल, ट्रांसप्लांटेशन और उसके रख-रखाव के नियमों को सुनिश्चित करता है। साथ ही इस कानून मानव अंगों की तस्करी रोकने के लिए भी कठोर प्रावधान हैं। कानून के मुताबिक, किसी व्यक्ति का ब्रेन स्टेम डेड होना मृत्यु का प्रमाण है। इसके बाद परिवार की सहमति से उसके शरीर के अंग और टिशूज डोनेट और ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं।

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