NCERT textbook controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को शामिल किए जाने पर चिंता व्यक्त की है। यह मामला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक के दौरान सामने आया, जब प्रधानमंत्री ने इस विषय की उपयुक्तता और पाठ्यपुस्तक को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने कहा, “हम कक्षा 8 के बच्चों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में क्या सिखा रहे हैं?”
पाठ्यपुस्तक में संवेदनशील सामग्री
सूत्रों ने बताया कि पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक मामला शामिल किया गया है। यह मामला सरकार के भीतर अब समीक्षा के अधीन है। प्रधानमंत्री ने इस सामग्री की निगरानी और मंजूरी पर भी चिंता व्यक्त की, यह पूछते हुए कि स्कूल तक पहुँचने से पहले इस तरह की सामग्री का अनुमोदन कौन कर रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि संवेदनशील संस्थागत मुद्दों को स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक चरण में शामिल करने के तरीके पर सवाल उठ रहे हैं।
उम्र के हिसाब से सामग्री की उपयुक्तता
प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के लिए तैयार की गई सामग्री में इस तरह के गंभीर और संवेदनशील मुद्दे शामिल करना सही है या नहीं। कक्षा 8 के छात्र आम तौर पर 13–14 वर्ष के होते हैं, और उनके लिए न्यायपालिका और भ्रष्टाचार जैसे विषयों को किस प्रकार पेश किया जाए, यह शिक्षकों और पाठ्यक्रम तैयार करने वाले अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निगरानी पर सवाल
प्रधानमंत्री ने यह भी ध्यान दिलाया कि इस तरह की सामग्री को पाठ्यपुस्तक में शामिल करने से पहले उचित समीक्षा और अनुमोदन होना चाहिए। इससे यह सवाल उठता है कि क्या पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और अनुमोदन के दौरान पर्याप्त सुरक्षा और नियंत्रण उपाय अपनाए जा रहे हैं। उनकी चिंता यह भी दर्शाती है कि स्कूली शिक्षा में संवेदनशील विषयों की जिम्मेदारी किसकी है और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।
संशोधन या वापसी की संभावना
इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि इस मामले में संशोधन किया जाएगा या सामग्री को पूरी तरह से वापस लिया जाएगा। हालांकि, संभावना है कि संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर विचार करेंगे और भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा और मंजूरी की प्रक्रिया में और अधिक सतर्कता बरतेंगे।
शिक्षा में जवाबदेही
यह मामला पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता, उनकी उम्र उपयुक्तता और संवेदनशील विषयों की निगरानी पर ध्यान केंद्रित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम में संवेदनशील मुद्दों को शामिल करते समय बच्चों की मानसिक और बौद्धिक क्षमता को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री के निर्देशों से स्पष्ट होता है कि पाठ्यपुस्तकों की तैयारी में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।

