Pakistan fuel price hike: पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और ‘हाई-स्पीड डीजल’ की कीमतों में प्रति लीटर 55 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो देश में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। यह कदम मध्य-पूर्व में बिगड़ती परिस्थितियों और वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभाव के बाद उठाया गया। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक, उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार, और वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने शुक्रवार आधी रात से ठीक पहले कीमतों में बदलाव की सूचना दी।सरकार ने यह आश्वासन भी दिया कि देश में पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी भी तरह की आपूर्ति समस्या नहीं आने दी जाएगी।
डीजल और पेट्रोल की नई दरें
ताजा बढ़ोतरी के बाद ‘हाई-स्पीड डीजल’ की डिपो पूर्व कीमत अब 335.86 रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जबकि इससे पहले यह 280.86 रुपये प्रति लीटर थी। इसका मतलब है कि डीजल की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पेट्रोल की डिपो पूर्व कीमत भी 266.17 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 321.17 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जो करीब 17 प्रतिशत का इजाफा दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, अली परवेज मलिक ने कहा कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और अस्थिर परिस्थितियों ने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर गहरा असर डाला है।
आपूर्ति सुरक्षा और जमाखोरी पर कड़ी चेतावनी
पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर है, जो मौजूदा संघर्ष के कारण प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार आपूर्ति पर लगातार नजर रख रही है और पेट्रोलियम उत्पादों की जमाखोरी या कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मलिक ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के दो तेल पोत वैकल्पिक मार्गों से आ रहे हैं ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों की साप्ताहिक समीक्षा करेगी।
अंतरराष्ट्रीय स्थिति सुधारने पर कीमतों में कमी का आश्वासन
पेट्रोलियम मंत्री ने आगे कहा, “जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्थिति में सुधार होगा, हम उतनी ही तेजी से कीमतें कम करेंगे।” इससे पहले उप-प्रधानमंत्री इसहाक डार ने कहा था कि वैश्विक तेल संकट के कारण तेल कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। डार ने यह भी बताया कि कई देशों में वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें स्वतः बढ़ जाती हैं, लेकिन पाकिस्तान ने कोशिश की है कि उपभोक्ताओं पर बोझ न्यूनतम रहे और कीमतों का संतुलित समाधान निकाला जा सके।
मध्य-पूर्व संकट का असर
अली परवेज मलिक ने कहा, “एक पड़ोसी देश में लगी आग अब पूरे क्षेत्र में फैल गई है। हमें नहीं पता कि यह संकट कितने समय तक जारी रहेगा और इसका समाधान कब तक होगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि मध्य-पूर्व की अस्थिरता के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ गई है और यही कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण है। सरकार का मकसद है कि आपूर्ति संकट से निपटते हुए देशवासियों पर वित्तीय बोझ कम से कम रहे और तेल उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

