Operation Marksheet: आज डिग्री हासिल करने का मतलब मेहनत और पढ़ाई नहीं, बल्कि जेब की ताकत बनता जा रहा है। न क्लास की जरूरत, न परीक्षा का दबाव बस रकम तय कीजिए और डिग्री घर मंगवा लीजिए। ऐसे में सवाल उठता है कि जो छात्र ईमानदारी से पढ़ाई कर रहे हैं, उनके सपनों का क्या होगा? अगर डिग्रियां बाजार में बिकेंगी, तो देश को योग्य प्रोफेशनल कैसे मिलेंगे?
हम आपको नोएडा की महर्षि यूनिवर्सिटी से जुड़ा एक ऐसा मामला बताने जा रहे हैं, जो देश के युवाओं के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब भी ‘विकसित भारत’ की बात होती है, तो युवाओं को इसकी नींव बताया जाता है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बार-बार छात्रों से संवाद कर मेहनत और ईमानदारी पर जोर देते हैं। लेकिन महर्षि यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि वह युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करते हुए फर्जी डिग्रियों का कारोबार चला रही है।
बिना पढ़ाई, बिना परीक्षा, मोटी रकम में डिग्री
बता दें कि इस यूनिवर्सिटी में बिना क्लास, बिना एग्जाम और बिना प्रैक्टिकल के मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग और लॉ जैसी डिग्रियां बेची जा रही हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि छात्रों की जगह परीक्षा देने के लिए दूसरे लोग भी उपलब्ध कराए जाते हैं। यानी छात्र अपनी जिंदगी आराम से बिताए और यूनिवर्सिटी उसकी परीक्षा भी दिलवा दे।
ऐसे में बिना ज्ञान के तैयार होने वाले प्रोफेशनल्स देश को किस दिशा में ले जाएंगे, यह सोचने वाली बात है। जनहित में किए गए इस स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे के सामने आए तथ्य यह दिखाते हैं कि किस तरह खुलेआम फर्जी डिग्रियों का खेल चल रहा है।
छात्र बनकर पहुंची टीम, डायरेक्टर से हुआ सौदा
सूचना मिलने के बाद हमारी टीम ने छात्र बनकर महर्षि यूनिवर्सिटी से संपर्क किया। यहां हमारी मुलाकात यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (कॉरपोरेट अफेयर्स) रतीश गुप्ता से हुई। बता दें कि शुरुआती बातचीत में ही उन्होंने फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने की बात स्वीकार कर ली। एलएलबी की डिग्री के लिए तीन लाख रुपये का सौदा तय हुआ और पहले ही दिन 50 हजार रुपये एडवांस मांगे गए।
अगली मुलाकात में बाकी ढाई लाख रुपये की मांग की गई। इसके साथ ही यह भी ऑफर दिया गया कि अगर 30 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएं, तो परीक्षा देने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी कोई और उम्मीदवार की जगह पेपर दे देगा। बातचीत में यह भी दावा किया गया कि पहले भी ऐसे कई मामलों में डिग्रियां दिलवाई जा चुकी हैं।
किस तरह खुलेआम डिग्रियों की खरीद-फरोख्त का दावा किया जा रहा है। बिना पढ़ाई और बिना परीक्षा, सिर्फ पैसों के दम पर डिग्री देने की बात कही जा रही है। सोचिए, अगर फर्जी डिग्री वाला वकील अदालत में खड़ा होगा या बिना ज्ञान वाला इंजीनियर पुल बनाएगा, तो उसका खतरा सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा। पूरा समाज इसकी कीमत चुकाएगा। सवाल यही है कि अगर डिग्रियां इसी तरह बिकती रहीं, तो देश का भविष्य किसके हाथों में जाएगा?
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