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महर्षि आश्रम में कंक्रीट का जंगल, आस्था की जमीन पर हजारों करोड़ का लैंड स्कैम उजागर! फिर भी सिस्टम चुप क्यों?

by | Jan 29, 2026 | News Featured

Maharishi Ashram Land Scam: नोएडा की वो पवित्र धरती, जहां कभी महर्षि महेश योगी के आश्रम में योग, ध्यान और आध्यात्म की धारा बहती थी, आज 29 जनवरी 2026 को एक विशाल कंक्रीट जंगल में तब्दील हो चुकी है। महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MUIT) का कैंपस और आश्रम इलाका अब अवैध निर्माण और जमीन घोटाले का गढ़ बन गया है। न्यूज इंडिया की एक्सक्लूसिव जांच से खुलासा हुआ है कि धार्मिक और शैक्षिक उद्देश्य से मिली जमीन पर 70 से ज्यादा हाई-राइज बिल्डिंग्स खड़ी हो गईं वो भी बिना नक्शा पास और बिना वैध रजिस्ट्री के। फ्लैट्स बिक रहे हैं, करोड़ों का कारोबार चल रहा है लेकिन सवाल ये कि ये सब किसकी शह पर हो रहा है?

नोएडा प्राधिकरण ने हाल ही में 50 से ज्यादा इमारतों पर नोटिस चस्पा किए हैं और 39 बिल्डर्स तथा व्यक्तियों के नाम सामने लाए हैं, लेकिन अब तक किसी तरह की कोई कार्रवाई का नामोनिशान तक नहीं। क्या महर्षि यूनिवर्सिटी की जमीन पर एक नया अवैध शहर बस गया है? सालारपुर खादर, भंगेल और हाजीपुर जैसे गांवों में फैला ये इलाका अब प्रॉपर्टी का काला बाजार बन चुका है। आरोप है कि आश्रम और यूनिवर्सिटी से जुड़ी धार्मिक-शैक्षिक जमीन को अवैध रूप से बेचा जा रहा है। बिल्डर्स बिना परमिशन के फ्लैट बना रहे हैं और भोले-भाले लोगों को झांसा देकर बेच रहे हैं।

न्यूज इंडिया की पड़ताल से पता चलता है कि महर्षि यूनिवर्सिटी की बाउंड्री में करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन पड़ी है- ये नवीन प्रति खेल के मैदान वाली बंजर टाइप की जमीन है, जो जनता के सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है। ऐसी जमीन कभी बेची नहीं जा सकती, लेकिन प्रबंधन फर्जी तरीके से बेच रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कैसे चलता है ये खेल? पहले सरकारी जमीन पर एग्रीमेंट, फिर फर्जी लोगों के नाम पर रजिस्ट्री। राजस्व विभाग की जमीनें खुलेआम बिक रही हैं। उदाहरण के तौर पर, खसरा नंबर 226 में महर्षि यूनिवर्सिटी का सिर्फ 1500 गज का हक है, लेकिन इन्होंने आसपास की पूरी 100 बीघा सरकारी जमीन को फर्जी तरीके से बेच दिया।

इसी तरह खसरा नंबर 891, 843, 844, 845, 884, 885 और 791 पर नोएडा अथॉरिटी और सरकारी विभागों का नाम दर्ज है, फिर भी महर्षि ट्रस्ट ने इन्हें बेच दिया। फर्जीवाड़ा इतना शातिर है कि रजिस्ट्री एक खसरे पर होती है, लेकिन कब्जा किसी दूसरे पर थमा दिया जाता है। यहां तक कि प्राधिकरण द्वारा एक्वायर की गई जमीनों को भी बेचा जा रहा है, जिनके लिए मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। ऐसे में बड़ा सवाल कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड कौन हैं तो जवाब है महर्षि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अजय श्रीवास्तव और राहुल भारद्वाज। दोनों रियल एस्टेट कंपनियों से मिलकर ये खेल चला रहे हैं। न्यूज इंडिया ने 6 महीने पहले ही ये खुलासा किया था, जिसके बाद सेक्टर-39 थाने में दो मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। ये जमीनें नैतिक और धार्मिक कार्यों के लिए दी गई थीं, लेकिन आज ये देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार बन चुकी हैं।

न्यूज इंडिया की कवरेज के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि किसी भी सरकारी विभाग के किसी अधिकारी ने बात करने से साफ इनकार कर दिया। महर्षि यूनिवर्सिटी (Maharishi Ashram Land Scam) या महर्षि प्रबंधन का नाम आते ही नोएडा के जिलाधिकारी और संबंधित विभागों को जैसे सांप सूंघ जाता है। क्यों इस पर कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है? क्या कोई बड़ा राज है, या मिलीभगत इतनी गहरी है कि सिस्टम चुप्पी साधे बैठा है? गौतम बुद्ध नगर डीएम से लेकर नोएडा प्राधिकरण तक- सबने जवाब देने से मना कर दिया। आसपास की सोसायटीज के लोग शिकायत कर रहे हैं लेकिन ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हुई।

यूपी सरकार, गौतम बुद्ध नगर प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी से अपील है- जागिए! ये देश का सबसे बड़ा लैंड स्कैम है, हजारों करोड़ की सरकारी जमीन लूट ली जा रही है। अगर अब कार्रवाई नहीं हुई, तो ये कंक्रीट का जंगल आस्था की पूरी धरती निगल जाएगा। अगर आपके पास कोई जानकारी है, तो न्यूज इंडिया से संपर्क करें। सच छुपेगा नहीं!

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