India-EU Summit 2026: भारत और EU के बीच दिल्ली में महा डील पर मुहर लगने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है। उन्होंने कहा कि आज 27 तारीख है कि ये सुखद संयोग है कि आज ही के दिन यूरोपीय यूनियन के साथ समझौता कर रहा है। यह डील किसानों और छोटे उद्योगों की पहुंच को यूरोपीय मार्केट तक आसान करेगा। उन्होंने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया है।
डील में ये फोकस पर रहे
आज की बैठक का व्यापक फोकस व्यापार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने पर है। दोनों पक्ष एक रक्षा ढांचा समझौते और एक रणनीतिक एजेंडे को दुनिया के सामने रखने के लिए भी तैयार हैं. दोनों के बीच नई साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप अमेरिका और चीन पर अपनी निर्भरता कम करने और अन्य क्षेत्रों के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को गहरा करने की कोशिश कर रहा है।
डील के बाद ये होगा सस्ता
लग्जरी कारें: अगर आप मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू या ऑडी जैसी यूरोपीय कारों के दीवाने हैं, तो यह डील आपके लिए जैकपॉट है। अब तक इन कारों पर 100% से ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी। समझौते के तहत, 15,000 यूरो (करीब 16.3 लाख रुपये) से महंगी कारों पर ड्यूटी घटाकर 40% कर दी जाएगी और धीरे-धीरे यह 10% तक नीचे आएगी। इससे इन लग्जरी कारों की कीमतों में लाखों रुपये की कमी आएगी।
वाइन-व्हिस्की: यूरोपीय वाइन और व्हिस्की पर फिलहाल 100-125% तक टैक्स लगता है. इस ऐतिहासिक डील के बाद फ्रांस, इटली और स्पेन की मशहूर वाइन पर टैक्स भारी कटौती के साथ कम होगा। अब विदेशी प्रीमियम ब्रांड्स का स्वाद चखना आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ेगा।
दवाएं-मेडिकल उपकरण: यूरोप अपनी अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक के लिए जाना जाता है। इस समझौते से कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों की विदेशी दवाएं (Pharma) और आधुनिक मेडिकल मशीनरी सस्ती होंगी. इसके अलावा, भारत की जेनेरिक दवाओं के लिए यूरोप के 27 देशों के बाजार खुल जाएंगे।
भारत को मिलेंगे 500 मिलियन यूरो
व्यापार के अलावा, यह समझौता जलवायु परिवर्तन की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यूरोपीय संघ अगले दो वर्षों के भीतर भारत को 500 मिलियन यूरो (लगभग 4,500 करोड़ रुपये) की सहायता देगा। यह फंड भारत के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण के अनुकूल औद्योगिक विकास को रफ्तार देने में खर्च किया जाएगा। इसके लिए 2026 की पहली छमाही में एक विशेष ‘क्लाइमेट एक्शन प्लेटफॉर्म’ भी लॉन्च किया जाएगा।
अमेरिका ने दी प्रतिक्रिया
अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट ने इस मुद्दे को अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच बलिदान में असंतुलन के रूप में पेश किया है। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ तो अमेरिका ने रूस के ऊर्जा व्यापार को अस्थिर करने के लिए दबाव डाला है, तो दूसरी तरफ यूरोप वैश्विक तेल व्यापार में खामियों से आर्थिक रूप से फायदा कमा रहा है। बता दें कि ट्रंप सरकार ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जिसमें दिल्ली की रूसी तेल खरीद पर 25 प्रतिशत टैरिफ भी शामिल है।
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