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अमेरिका के साथ डील खत्म कर सकता है EU! ट्रम्प की दादागिरी से बढ़कर देश

EU-US Trade Deal Crisis: यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के बीच प्लान की गई ऐतिहासिक ट्रेड डील अब फिर से अनिश्चितता की कगार पर है। इसका कारण है सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला, जिसने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के बड़े टैरिफ़ को अवैध घोषित कर दिया। इस फैसले का असर EU और अन्य वैश्विक ट्रेड पार्टनर्स के साथ चल रही बातचीत पर पड़ा है।

EU की आपात बैठक

यूरोपियन पार्लियामेंट की ट्रेड कमिटी के चेयरमैन बर्न्ड लैंग ने रविवार को कहा कि सोमवार को एक आपात बैठक में वह टर्नबेरी एग्रीमेंट को मंजूरी देने की प्रक्रिया को रोकने का प्रस्ताव रखेंगे। उनका तर्क है कि सांसदों को वाशिंगटन से US ट्रेड पॉलिसी की पूरी कानूनी स्थिति और स्पष्ट गारंटी मिलने तक इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

लैंग ने X (पूर्व Twitter) पर लिखा, “U.S. एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से पूरी तरह टैरिफ़ अव्यवस्था है। कोई इसे समझ नहीं पा रहा EU और अन्य ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए सिर्फ सवाल और बढ़ती अनिश्चितता है।” इस पर EU ग्रीन्स ग्रुप ने भी समर्थन जताया।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

शुक्रवार को 6-3 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया ताकि वे बड़े ग्लोबल टैरिफ़ लगा सकें। इस फैसले ने ट्रंप के ट्रेड एजेंडा की कानूनी आधारशिला को कमजोर कर दिया, जिसमें कई बाइलेटरल एग्रीमेंट शामिल थे। ट्रंप ने फैसले के तुरंत बाद प्रतिक्रिया दी। व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कुछ जजों को “देशद्रोही और संविधान के प्रति वफादार नहीं” बताया और कहा कि वे “विदेशी हितों से प्रभावित” थे। इसके बावजूद, उन्होंने कानूनी रास्तों से तुरंत नए टैरिफ़ लागू करने का कदम उठाया।

• फैसले वाले दिन ही 10% ग्लोबल टैरिफ़ की घोषणा
• अगले 36 घंटे में इसे बढ़ाकर 15% किया गया
• नया रेट 150 दिनों के लिए लागू होगा

इस अचानक बदलाव ने EU और अन्य ट्रेडिंग पार्टनर्स को कन्फ्यूज़ कर दिया।

US-EU टर्नबेरी एग्रीमेंट का वर्तमान हाल

US-EU टर्नबेरी एग्रीमेंट पर पिछले जुलाई में ट्रंप के स्कॉटिश गोल्फ रिजॉर्ट में समझौता हुआ था।

मुख्य शर्तें-

• EU ने कुछ अमेरिकी सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम करने पर सहमति दी
• US ने यूरोपीय एक्सपोर्ट पर 15% टैरिफ़ तय किया

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद यह कानूनी आधार खो चुका है। नया 15% टैरिफ़ अलग कानूनी आधार पर लागू है और 150 दिनों में खत्म होगा, जब तक कि US कांग्रेस कोई नया निर्णय न ले।

यूरोपियन सांसदों की चिंता

सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद यूरोपीय सांसद कानूनी आधार और शर्तों में अचानक बदलाव को लेकर चिंतित हैं। इस वजह से EU पार्लियामेंट में डील की मंजूरी अभी टाल दी गई है। यह हफ़्तों में डील पर पार्लियामेंट्री काम का दूसरा सस्पेंशन है।

भारत पर असर

भारत भी उन देशों में शामिल है, जो अमेरिका के साथ अंतरिम ट्रेड डील पर अंतिम हस्ताक्षर करने के करीब थे। भारतीय कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि डील अगले महीने साइन होने की संभावना है और अप्रैल से लागू होगी। ट्रंप ने भारत के बारे में कहा, “चिंता की कोई बात नहीं है। वे टैरिफ़ देंगे, हम टैरिफ़ नहीं देंगे। प्रधानमंत्री मोदी एक महान व्यक्ति हैं।”

रिपब्लिकन पार्टी और अमेरिका में राजनीतिक प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट फैसले ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर दरारें भी सामने ला दीं।

• सीनेटर रैंड पॉल ने फैसले की तारीफ़ “हमारे रिपब्लिक की रक्षा” के रूप में की
• रिप्रेजेंटेटिव डॉन बेकन ने इसे “कॉमन सेंस” बताया
• हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा कि कांग्रेस और एडमिनिस्ट्रेशन आगे का रास्ता तय करेंगे

ट्रंप ने शुक्रवार रात ट्रुथ सोशल पर रिपब्लिकन सांसदों पर निशाना साधा और लिखा, “रिपब्लिकन खुद के प्रति बेवफ़ा हैं! एकजुट हों, साथ रहें और जीतें।”

अब स्थिति क्या है?

अभी EU हेडक्वार्टर ब्रुसेल्स महीनों तक डील के फ़ाइनल वोट का इंतज़ार कर रहा है। टर्नबेरी एग्रीमेंट पर वोट फिलहाल कुछ दूर की संभावना लग रही है। इस फैसले और ट्रंप के टैरिफ़ बदलाव ने वैश्विक व्यापार और कई देशों के ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है।

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