Avimukteshwaranand warning: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच का विवाद बढ़ता जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को उसके खिलाफ कोर्ट जाने का चेतावनी दी है। मालूम हो कि मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य की पदवी तक पहुंच गया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 घंटे में मेला प्रशासन को 8 पेजों का जवाब ई-मेल के जरिए भेजा है। नोटिस को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नहीं
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है, जिससे मुझे शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोका गया हो। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी तीसरे पक्ष को टिप्पणी करने या रोक लगाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने प्रशासन को नोटिस वापस लेने की चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे।
प्रयागराज मेला प्रशासन ने क्या कहा था
बीते दिन मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के एक आदेश का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर पूछा था कि उन्होंने खुद को शंकराचार्य कैसे घोषित कर लिया।
विवाद पर क्या कहना है रामभद्राचार्य
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ। अन्याय तो उन्होंने किया है। स्नान के लिए गंगा तक पालकी से जाने का नियम नहीं है। हम लोग भी पैदल ही जाते हैं। सरकार ने उन्हें खुद को शंकराचार्य साबित करने के लिए बिल्कुल सही नोटिस जारी किया है।
अविमुक्तेश्वरानंद को स्वामी सदानंद का मिला साथ
इधर, द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर स्नान करने से रोके जाने की निंदा की। उन्होंने कहा, ‘प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए। ब्राह्मणों को पुलिस ने चोटी पकड़कर घसीटा। यह शासन का अहंकार है। सत्ता हर दिन नहीं रहेगी। गंगा स्नान से रोकने वालों को गो-हत्या का पाप लगता है।’
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