Pakistan politics: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा में संघर्ष खत्म करने को लेकर लाई गई योजना बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर डॉक्युमेंट में पाकिस्तान के हस्ताक्षर करने पर देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर की विपक्षी दल व संगठन आलोचना कर रहे हैं।
सर्वसम्मति से फैसला नहीं लेने का है आरोप
पीटीआई के दिग्गज नेता असद कैसर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने सर्वसम्मति से इतना संवेदनशील फैसला लेने की जहमत नहीं उठाई । उन्होंने कहा, “उन्हें वैश्विक समुदाय को गलत धारणा देने के लिए कम से कम संसद में इस पर चर्चा करनी चाहिए थी कि पाकिस्तान में लोकतंत्र है।
जेयूआई-एफ ने भी नाराजगी जताई
पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआई-एफ) ने भी सरकार के स्टैंड के प्रति नाराजगी जताई है। संगठन प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने हमास को निरस्त्र करने के किसी भी अभियान का हिस्सा बनने के खिलाफ चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोग बोर्ड का हिस्सा हैं। उन्होंने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली (संसद) में कहा, “ट्रंप से शांति की उम्मीद करना मूर्खों के स्वर्ग में रहने के समान हैय़” उन्होंने इस बात पर जोर डाला कि ट्रंप ही बोर्ड के अध्यक्ष हैं और उन्होंने अपने विवेक से सदस्यों की नियुक्ति की है।
संसद में अपना बचाव कर रही शहबाज सरकार
नेशनल असेंबली में बोलते हुए संसदीय कार्य मंत्री और शहबाज की पार्टी PMLN के बड़े नेता डॉ. तारिक फजल चौधरी ने कहा कि फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान का सैद्धांतिक रुख है और उसने हमेशा इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड में शामिल होने का पाकिस्तान का निर्णय राष्ट्रीय हित और मुस्लिम उम्माह की सामूहिक प्राथमिकताओं को देखते हुए है, न कि राजनीतिक विचारों की वजह से। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में स्थायी युद्धविराम और गाजा के पुनर्निर्माण की बात की गई है।
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