Israel US joint operation: ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बारे में दावा किया गया है कि शनिवार को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त अभियान में हुए हवाई हमले में उनकी मृत्यु हो गई। इस घटनाक्रम को वैश्विक स्तर पर चौंकाने वाला बताया जा रहा है, हालांकि रिपोर्टों के मुताबिक यह कार्रवाई लंबे समय से तैयार की जा रही एक गुप्त खुफिया योजना का हिस्सा थी। बताया जाता है कि तेहरान में निगरानी तंत्र, विशेषकर ट्रैफिक कैमरों, पर वर्षों से साइबर घुसपैठ की जा रही थी।
सुरक्षा ढांचे की मैपिंग
खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राजधानी में स्थापित एक विशेष कैमरे से सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई। इससे कथित तौर पर यह पता चला कि वरिष्ठ अधिकारियों के अंगरक्षक अपनी निजी गाड़ियां कहां खड़ी करते थे और सुरक्षित परिसर के भीतर उनकी दिनचर्या क्या थी। इन जानकारियों को उन्नत एल्गोरिदम के जरिए अन्य खुफिया सूचनाओं के साथ जोड़ा गया, जिसमें सुरक्षा कर्मियों के पते, ड्यूटी शेड्यूल और आवागमन के मार्ग शामिल थे। विशेषज्ञ इसे “पैटर्न ऑफ लाइफ” विश्लेषण बताते हैं, जिसके जरिए लक्ष्य की गतिविधियों का सूक्ष्म नक्शा तैयार किया जाता है।
ट्रंप की घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को खामेनेई की मौत की घोषणा की। बाद में ईरान की ओर से भी इसकी पुष्टि की बात कही गई। इस घोषणा के बाद तेहरान में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ इलाकों में शोक, तो कहीं आक्रोश और अविश्वास। पाश्चर जिले के ऊपर धुएं के गुबार देखे जाने की खबरें भी आईं, जहां खामेनेई का आधिकारिक परिसर स्थित था।
मोबाइल नेटवर्क में कथित हस्तक्षेप
रिपोर्टों के अनुसार, हमले से पहले पाश्चर स्ट्रीट के आसपास मोबाइल टावरों के कुछ हिस्सों में व्यवधान उत्पन्न किया गया, जिससे कॉल बाधित दिखाई दें और सुरक्षा टीम को संभावित चेतावनी संदेश न मिल सकें। यह कदम कथित तौर पर संचार तंत्र को अस्थायी रूप से निष्क्रिय करने की रणनीति का हिस्सा था।
इजरायली खुफिया तंत्र की भूमिका
बताया जाता है कि इजरायल की सिग्नल इंटेलिजेंस इकाई यूनिट 8200 ने तकनीकी सहायता प्रदान की, जबकि विदेशों में मानव स्रोतों के नेटवर्क के जरिए अतिरिक्त जानकारी जुटाई गई। विशाल डेटा सेट को प्रोसेस कर दैनिक परिचालन ब्रीफ तैयार किए गए। सोशल नेटवर्क विश्लेषण जैसी गणितीय तकनीकों का उपयोग कर प्रभावशाली संपर्क बिंदुओं की पहचान की गई और संभावित लक्ष्यों का चयन किया गया।
इजरायली खुफिया अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल इताई शापिरा के अनुसार, लक्ष्य-आधारित खुफिया जानकारी तैयार करना वहां की रणनीतिक संस्कृति का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, यदि राजनीतिक नेतृत्व किसी कार्रवाई का निर्णय लेता है, तो खुफिया तंत्र उसे लागू करने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है।
पूर्व अभियानों का संदर्भ
रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि पिछले वर्ष जून में 12 दिन चले संघर्ष के दौरान शुरुआती हमलों में कई ईरानी परमाणु वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी मारे गए थे। उस दौरान साइबर हमलों, ड्रोन अभियानों और लंबी दूरी की सटीक मिसाइलों का इस्तेमाल कर वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय किया गया था। एक अधिकारी ने कहा, “हमने पहले उनकी आंखें छीनीं,” इशारा रडार और निगरानी तंत्र को नष्ट करने की ओर था।
राजनीतिक निर्णय या तकनीकी क्षमता?
विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई को निशाना बनाना केवल तकनीकी दक्षता का परिणाम नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक फैसला भी था। आकलन यह था कि खुले युद्ध की स्थिति में वरिष्ठ नेताओं का पता लगाना कठिन हो जाता, क्योंकि वे भूमिगत बंकरों में चले जाते।
खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से कई बार संभावित हत्या की आशंका का जिक्र किया था और अपनी मृत्यु को इस्लामी गणराज्य के भविष्य के लिए निर्णायक न मानने की बात कही थी। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि उन्होंने शहादत की संभावना को भी स्वीकार किया था।

